Saalichouka News: कलयुग में हरिनाम जप ही सर्वोत्तम तपस्या — आचार्य विपिन बिहारी, बसुरिया में पंचकुण्डीय रुद्र महायज्ञ में उमड़ी भक्तों की भीड़
सालीचौका के बसुरिया में पंचकुण्डीय रुद्र महायज्ञ के तीसरे दिन आचार्य विपिन बिहारी ने कहा — कलयुग में तपस्या कठिन, हरिनाम जप ही मोक्ष का सरल मार्ग है। भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी।

संवाददाता अवधेश चौकसे
सालीचौका (नरसिंहपुर)। समीपस्थ बंदेमातरम आश्रम रेशम केंद्र के पास स्थित बेरखैड़ी हार, बसुरिया में चल रहे पंचकुण्डीय रुद्र महायज्ञ, रुद्री निर्माण एवं शिव महापुराण साप्ताहिक ज्ञान यज्ञ के तीसरे दिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी।
इस दौरान बुंदेलखंड के प्रसिद्ध कथा व्यास आचार्य गौपीठाधीश्वर महंत 108 श्री विपिन बिहारी ने भक्ति और ज्ञान से ओतप्रोत कथा सुनाकर भक्तों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कलयुग में तपस्या कठिन, हरिनाम जप ही श्रेष्ठ — आचार्य विपिन बिहारी
महंत श्री विपिन बिहारी ने नारद मुनि जी के दृष्टांत का संगीतमय वर्णन करते हुए कहा —
“इस कलयुग में तपस्या और व्रत निभाना कठिन है। केवल हरिनाम जप और श्रीराम नाम स्मरण ही सुलभ मार्ग है, जो मोक्ष तक ले जा सकता है। पहले के संत महीनों तक बिना भोजन के तप करते थे, आज मनुष्य 24 घंटे भी भूखा नहीं रह सकता।”
उन्होंने कहा कि मनुष्य को अहंकार त्यागकर संत संगति करनी चाहिए, क्योंकि “दीपक के पास रखा कपूर भी चिंगारी से महक उठता है।”
संत संगत से जीवन में सकारात्मक परिवर्तन अवश्य आता है।
“भजन में प्रशंसा, प्रणाम और पुष्प नहीं होने चाहिए”
आचार्य ने कहा कि हरि भजन में प्रशंसा, प्रणाम और पुष्प अर्पण जैसी बातें बाधा उत्पन्न करती हैं। उन्होंने कहा, “संत और माया का कभी मिलाप नहीं होता। आज कुछ लोग धर्म के नाम पर ढोंग कर रहे हैं, परंतु सच्चा संत वही है जो त्याग और सत्य के मार्ग पर चलता है।”
महिलाओं से किया सादगी का आग्रह
कथा के दौरान उन्होंने उपस्थित महिलाओं से निवेदन किया कि महंगे आभूषण पहनकर कथा में न आएं, बल्कि सादगी और श्रद्धा के साथ भगवान की कथा श्रवण करें।
उन्होंने दूध-पानी की निकटता और नारद-विष्णु मोहिनी प्रसंग का उदाहरण देकर भक्ति का गूढ़ संदेश दिया।







