मध्य प्रदेश

स्कूली बच्चों की फैंसी ड्रेस प्रतियोगिता में दिखा धार्मिक झुकाव

करेली(पूजा मालवीय)। नगर की प्रमुख्यतम आदर्श शिक्षण समिति द्वारा संचालित सेठ छिदमी लाल पालीवाल शिशु विद्यालय में सांस्कृतिक कार्यक्रम में फैंसी ड्रेस कंप्टीशन में अभिभावकों का रुझान पाश्चात्य शैली में न होकर धार्मिकता की ओर रहा। धार्मिक वेश-भूषा बच्चों को अपनी संस्कृति, धर्म और परंपराओं से जोड़ती है। बच्चा जब किसी देवी-देवता, संत या ऐतिहासिक धार्मिक चरित्र की वेशभूषा पहनता है, तो वह उसके बारे में सीखता भी है। किंडर गार्डन स्तर पर आयोजित इस प्रतियोगिता में कोई अर्धनारेश्वर, कोई हनुमान तो कोई श्री राम और माता जानकी के वेश में दिखा। शिशु विद्यालय की कक्षा केजी 1 में अध्ययनरत छात्रा कु अपेक्षा मालवीय श्री अर्धनारेश्वर के अवतार में नजर आयी।ऐसी ड्रेसेस में अक्सर सदाचार, सत्य, अहिंसा, कर्तव्य, करुणा, साहस जैसे अच्छे मूल्यों का संदेश होता है। धार्मिक वेश-भूषा से समाज में शांति, भाईचारा, नैतिकता और मानवता का संदेश दिया जा सकता है। आदर्श शिक्षण समिति के पालीवाल शिशु विद्यालय द्वारा आयोजित ये प्रतियोगिता हमारे समृद्धशाली धार्मिक इतिहास को आचरण में उतारने के लिए प्रेरणा साबित हुई है, अन्य शैक्षिक समितियों को भी ऐसे आयोजन करना चाहिए।

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