क्राइममध्य प्रदेश

ग्राम पंचायत बीजादेही में खर्चों पर उठे सवाल: 26 जनवरी की बूंदी से लेकर भोजन पैकेट के बिल तक विवाद

बैतूल जिले की ग्राम पंचायत बीजादेही में 26 जनवरी कार्यक्रम की बूंदी खरीदी और मुख्यमंत्री कार्यक्रम के भोजन पैकेट के बिल को लेकर ग्रामीणों ने अनियमितता के आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों ने पूरे मामले की वित्तीय जांच की मांग की है।

संवाददाता शैलेंद्र गुप्ता

शाहपुर/बैतूल। जनपद पंचायत शाहपुर की ग्राम पंचायत बीजादेही में पंचायत के खर्चों को लेकर ग्रामीणों ने गंभीर आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत में विभिन्न कार्यक्रमों के नाम पर फर्जी या बढ़े-चढ़े बिल लगाकर शासन की राशि का दुरुपयोग किया जा रहा है। ग्रामीणों ने पूरे मामले की निष्पक्ष वित्तीय जांच कराने की मांग की है।

26 जनवरी के कार्यक्रम में बूंदी खरीदी पर सवाल

ग्रामीणों के अनुसार पंचायत द्वारा 26 जनवरी गणतंत्र दिवस के कार्यक्रम के लिए बूंदी खरीदने का बिल लगाया गया है, जिसमें 80 किलो बूंदी 180 रुपये प्रति किलो की दर से खरीदी दिखायी गई है। इस हिसाब से कुल 14,400 रुपये का बिल बनाया गया है।

ग्रामीणों का आरोप है कि बाजार में बूंदी सामान्यतः 140 से 150 रुपये प्रति किलो के बीच आसानी से मिल जाती है। इसके अलावा बिल में यह भी स्पष्ट नहीं है कि बूंदी किस दुकान से खरीदी गई। बिना दुकान का नाम और उचित विवरण के बिल लगाए जाने से खर्च की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

मुख्यमंत्री कार्यक्रम के खर्च पर भी विवाद

ग्रामीणों ने एक और उदाहरण देते हुए बताया कि मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में बैतूल जाने के लिए पंचायत द्वारा 6 वाहन लगाए गए थे, जिनमें लगभग 60 लोग कार्यक्रम में शामिल होने गए थे।

इसके बावजूद पंचायत द्वारा 70 रुपये प्रति पैकेट की दर से 130 भोजन पैकेट का बिल लगाया गया, जिसकी कुल राशि 9,100 रुपये बताई गई है। इसके साथ ही 20 रुपये प्रति बोतल के हिसाब से 130 पानी की बोतलों का बिल भी लगाया गया, जिसकी राशि 2,600 रुपये दर्शाई गई है।

इस तरह भोजन और पानी का कुल बिल 11,700 रुपये का बनाया गया है।

संख्या और दर दोनों पर उठे सवाल

ग्रामीणों का कहना है कि जब कार्यक्रम में लगभग 60 लोग ही शामिल हुए थे, तो 130 भोजन पैकेट और 130 पानी की बोतलों की आवश्यकता क्यों पड़ी। ग्रामीणों ने यह भी बताया कि बाजार में पानी की एक पेटी करीब 100 रुपये में मिलती है, जिसमें 12 बोतल होती हैं। ऐसे में पंचायत द्वारा 20 रुपये प्रति बोतल की दर से भुगतान किया जाना भी संदेह पैदा करता है।

वित्तीय जांच की मांग

ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत में इसी तरह के कई बिल लगाए गए हैं, जिनमें सामग्री की दरें अधिक दिखाई गई हैं या वास्तविक संख्या से अधिक खर्च दर्शाया गया है। उनका कहना है कि यदि बिल-वाउचर, खरीदी रजिस्टर और भुगतान अभिलेखों की विस्तार से जांच की जाए तो वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है।

ग्रामीणों ने जनपद पंचायत शाहपुर और जिला प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

फिलहाल ग्राम बीजादेही में पंचायत खर्चों को लेकर उठे ये सवाल प्रशासन के लिए गंभीर विषय बनते जा रहे हैं। अब देखना होगा कि संबंधित अधिकारी इन आरोपों को कितनी गंभीरता से लेते हैं और जांच के बाद क्या कार्रवाई होती है।

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