बीजादेही की 200 मीटर सीसी सड़क पर गुणवत्ता के सवाल, ग्रामीणों ने की उच्च स्तरीय जांच की मांग

संवाददाता शैलेंद्र गुप्ता
Shahpur/बीजादेही। आदिवासी बहुल ग्राम बीजादेही में ब्रज के घर से बाजार चौक तक बन रही 200 मीटर लंबी सीसी सड़क निर्माण कार्य अब विवादों में घिर गया है। करीब 6 लाख 15 हजार रुपये की लागत से पांचवें राज्य वित्त आयोग की राशि से तैयार हो रही इस सड़क की गुणवत्ता पर ग्रामीणों ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
सीमेंट की मात्रा और मिश्रण पर आपत्ति
ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क निर्माण में सीमेंट की मात्रा निर्धारित मानकों से कम मिलाई जा रही है। कंक्रीट का मिश्रण सीमेंट, रेत और गिट्टी के संतुलित अनुपात में तैयार किया जाना चाहिए, लेकिन मौके पर डाला जा रहा मटेरियल कमजोर नजर आ रहा है। स्थानीय जानकारों का कहना है कि यदि सीमेंट कम डाला गया तो सड़क कुछ ही महीनों में दरारों से भर सकती है और ऊपरी परत उखड़ सकती है।
नींव और मोटाई को लेकर भी सवाल
सिर्फ मिश्रण ही नहीं, बल्कि सड़क की बेस तैयारी और किनारों की मजबूती को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। नियमानुसार ढलाई से पहले जमीन को समतल कर सघन बनाना और तय मोटाई रखना अनिवार्य होता है। ग्रामीणों का दावा है कि इन प्रक्रियाओं में जल्दबाजी और लापरवाही बरती जा रही है।
सूचना बोर्ड नदारद, पारदर्शिता पर सवाल
निर्माण स्थल पर अनिवार्य सूचना बोर्ड तक नहीं लगाया गया है। नियमों के अनुसार योजना का नाम, लागत, स्वीकृत राशि, तकनीकी स्वीकृति और जिम्मेदार अधिकारी का नाम प्रदर्शित करना जरूरी है। सूचना बोर्ड के अभाव में कार्य की पारदर्शिता पर भी प्रश्नचिन्ह लग गया है।
“कागजों में हो रही गुणवत्ता जांच”
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि निर्माण कार्य की निगरानी के लिए जिम्मेदार इंजीनियर मौके पर नियमित निरीक्षण नहीं कर रहे हैं। उनका कहना है कि गुणवत्ता जांच केवल कागजों में पूरी की जा रही है, जबकि जमीनी हकीकत अलग है।
पहले भी लग चुके हैं आरोप
इससे पहले सड़क निर्माण में स्थानीय मजदूरों को रोजगार न देने और मशीनों से कार्य कराए जाने के आरोप भी सामने आए थे। अब गुणवत्ता को लेकर उठ रहे सवालों ने मामले को और गंभीर बना दिया है।
उच्च स्तरीय जांच की मांग
ग्रामीणों ने मांग की है कि:
- उच्च स्तरीय तकनीकी टीम से मौके पर निरीक्षण कराया जाए।
- कंक्रीट मिश्रण के सैंपल की प्रयोगशाला जांच कराई जाए।
- सड़क की मोटाई और बेस की मजबूती की माप की जाए।
- पूरे कार्य की वित्तीय और तकनीकी समीक्षा हो।
बीजादेही की यह 200 मीटर सड़क अब प्रशासनिक जवाबदेही की परीक्षा बन चुकी है। ग्रामीणों की निगाहें अब जिम्मेदार अधिकारियों पर टिकी हैं कि वे त्वरित कार्रवाई कर पारदर्शी जांच सुनिश्चित करते हैं या मामला फाइलों तक सीमित रह जाता है।







