पानबरी में बिजली विभाग की लापरवाही से निजी कर्मचारी की दर्दनाक मौत, गुर्रा सब-स्टेशन का घेराव — ग्रामीणों का फूटा जनआक्रोश
पानबरी में बिजली विभाग की लापरवाही से आउटसोर्स कर्मचारी राम प्रसाद की करंट लगने से मौत। ग्रामीणों का गुर्रा सब-स्टेशन पर घेराव, FIR और मुआवजा की मांग तेज।

संवाददाता राकेश पटेल इक्का
इटारसी–रामपुर थाना क्षेत्र के ग्राम पानबरी में मंगलवार को बिजली विभाग की कथित लापरवाही ने एक और युवक की जान ले ली। आउटसोर्स व्यवस्था में काम कर रहे निजी कर्मचारी राम प्रसाद की पोल पर कार्य के दौरान अचानक करंट की चपेट में आकर मौके पर ही मौत हो गई।
ग्रामीणों के अनुसार यह घटना सिर्फ हादसा नहीं, बल्कि बिजली विभाग की घोर लापरवाही का परिणाम है।
करंट छोड़ने से हुई मौत, सुरक्षा मानकों की खुलेआम अनदेखी
ग्रामीणों और प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि—
- काम शुरू होने से पहले लाइन पूरी तरह बंद नहीं की गई थी।
- राम प्रसाद को सुरक्षा किट, ग्लव्स, सेफ्टी बेल्ट जैसे आवश्यक उपकरण उपलब्ध नहीं कराए गए थे।
- अचानक लाइन में करंट छोड़ दिया गया, जिससे उनकी तत्काल मृत्यु हो गई।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि विभाग लंबे समय से सुरक्षा प्रोटोकॉल की अनदेखी करता आ रहा है और हर बार मरता है गरीब आउटसोर्स कर्मी, जबकि नियमित कर्मचारियों को जोखिम भरे काम में आगे नहीं किया जाता।
गुर्रा सब-स्टेशन का घेराव, भाजपा नेता आशुतोष शरण तिवारी के नेतृत्व में प्रदर्शन
मौत की खबर फैलते ही पूरे क्षेत्र में आक्रोश फैल गया।
ग्रामीण, परिजन और स्थानीय लोग भाजपा नेता आशुतोष शरण तिवारी के नेतृत्व में गुर्रा सब-स्टेशन पहुंचे और जोरदार प्रदर्शन किया।
ग्रामीणों का आरोप—
“यह दुर्घटना नहीं, विभाग की लापरवाही से हुई हत्या है। हम जांच नहीं, सीधी कार्रवाई चाहते हैं।”
परिवार की हालत बदहाल — आर्थिक संकट गहराया
मृतक राम प्रसाद का परिवार पहले से ही आर्थिक कठिनाइयों से गुजर रहा था।
- पिता स्वयं आउटसोर्स नौकरी में काम कर चुके हैं।
- माँ पेंशन के सहारे किसी तरह घर चला रही थीं।
अब राम प्रसाद की मौत ने परिवार को आर्थिक और मानसिक रूप से पूरी तरह तोड़ दिया है।
विभाग ने घोषित की राशि, लेकिन ग्रामीणों ने उठाए सवाल
विभाग द्वारा—
- 5 लाख बीमा राशि
- 4 लाख विभागीय सहायता
की घोषणा की गई है।
लेकिन ग्रामीणों का तीखा सवाल—
“जिंदगी भर सुरक्षा नहीं, सम्मान नहीं… और मौत के बाद कागज पर लाखों? क्या यही इंसाफ है?”
ग्रामीणों की प्रमुख माँगें
- दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों पर FIR दर्ज की जाए।
- मृतक परिवार के एक सदस्य को स्थाई सरकारी नौकरी दी जाए।
- मुआवजा राशि तत्काल परिवार को सौंपी जाए।
- आउटसोर्स कर्मचारियों की सुरक्षा नीति बनाई जाए।
- पूरी टीम और सब-स्टेशन की जवाबदेही तय की जाए।
प्रणाली पर बड़े सवाल
यह घटना सिर्फ एक मौत नहीं, बल्कि व्यवस्था की खामियों की खुली पोल है—
- सुरक्षा मानक केवल कागजों पर पूरे किए जाते हैं,
- आउटसोर्स कर्मियों को बिना प्रशिक्षण और सुरक्षा उपकरणों के सबसे कठिन काम सौंपे जाते हैं,
- और हादसे के बाद विभाग हमेशा की तरह “जांच” कहकर मामला दबा देता है।
ग्रामीणों का साफ कहना है—
“अगर आज कार्रवाई नहीं हुई, तो कल फिर कोई राम प्रसाद मरेगा।”







