मध्य प्रदेश

धान खरीदी केंद्रों का नहीं हुआ निर्धारण: गाडरवारा वेयरहाउस एसोसिएशन ने 6 सूत्रीय मांगों के साथ कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन, हड़ताल की चेतावनी

संवाददाता अवधेश चौकसे

सालीचौका/गाडरवारा (नरसिंहपुर)। मध्य प्रदेश में समर्थन मूल्य पर धान उपार्जन 1 दिसंबर से शुरू करने की सरकारी घोषणा के बावजूद 5 दिसंबर तक नरसिंहपुर जिले में एक भी खरीदी केंद्र शुरू नहीं हो पाया है।

गाडरवारा इलाके में वेयरहाउस एसोसिएशन और प्रशासन के बीच मतभेद गहरा गया है, जिसके चलते किसान असमंजस में हैं और खरीदी कार्य अधर में लटका हुआ है।

इसी मुद्दे को लेकर गाडरवारा वेयरहाउस एसोसिएशन के प्रतिनिधियों ने कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर अपनी 6 सूत्रीय मांगों वाला ज्ञापन सौंपा। एसोसिएशन के अध्यक्ष जितेंद्र राय ने कहा कि—

“जब तक हमारी वाजिब और व्यावहारिक मांगों पर निर्णय नहीं होगा, खरीदी शुरू करवाना संभव नहीं है।”

एसोसिएशन की 6 प्रमुख मांगें — “प्राकृतिक सुखत का बोझ वेयरहाउस पर न डाला जाए”

1. प्राकृतिक सुखत (नेचुरल ड्राईंग लॉस) का जिम्मा वेयरहाउस पर न हो

एसोसिएशन ने कहा कि धान, मोटा अनाज और पान की खरीदी में प्राकृतिक सुखत (Moisture Loss) एक स्वाभाविक प्रक्रिया है।
जब तक शासन स्वयं इसका अधिकृत निर्धारण जारी नहीं करता,
प्राकृतिक कारणों से होने वाला सुखत
शासन/निगम वहन करे
➡ निजी गोदाम संचालकों को दोषी न ठहराया जाए

2. CWC (Central Warehousing Corporation) के समान मापदंड लागू हों

एसोसिएशन की मांग है कि MPWLC की stake holding और Loss–Men की गणना CWC के पैमानों पर निर्धारित की जाए—

  • 2 महीने तक — अधिकतम 2%
  • 4 महीने तक — अधिकतम 4%
  • 6 महीने तक — अधिकतम 6%
  • 6 महीने से अधिक अवधि — स्वीकृत सुखत मान्य

यह मॉडल पहले से CWC में लागू है, इसलिए राज्य में भी इसी पैटर्न की मांग उठाई गई है।

3. स्पष्ट नीति घोषित किए बिना भंडारण जिम्मेदारी लेने से इनकार

वेयरहाउस संचालकों ने कहा कि—

“उपार्जन शुरू होने से पहले नमी, वजन, लास-मेंन और सुखत की नीति CWC के अनुसार घोषित की जाए।
अन्यथा भंडारण की कमी और नुकसान का पूरा बोझ निजी वेयरहाउस पर अनावश्यक रूप से आ जाएगा।”

4. उपार्जन व्यवस्था स्पष्ट होने तक खरीदी कार्य रोकने का ऐलान

एसोसिएशन ने साफ चेतावनी दी कि—

“यदि शासन उपार्जन शुरू करने से पहले स्पष्ट भंडारण नीति जारी नहीं करता,
तो सभी गोदाम संचालक धान भंडारण से स्वयं को अलग कर हड़ताल पर जाने के लिए स्वतंत्र होंगे।”

इससे जिले में खरीदी प्रक्रिया पूरी तरह रुक सकती है।

जिले की स्थिति—5 दिन बाद भी एक भी खरीदी केंद्र शुरू नहीं

  • किसान अपनी उपज लेकर मंडी और केंद्रों की तरफ कई दिनों से चक्कर लगा रहे हैं।
  • प्रशासन और वेयरहाउस एसोसिएशन के बीच असहमति के चलते खरीदी सिरे नहीं चढ़ पा रही।
  • वहीं किसान लगातार आशंका जता रहे हैं कि देर होने से धान की गुणवत्ता, नमी और कीमत पर असर पड़ेगा।

एसोसिएशन की दूसरी मांगें भी दर्ज

ज्ञापन में अन्य समस्याओं, जैसे—

✔ निजी गोदामों पर अतिरिक्त निरीक्षण/दबाव
✔ परिवहन देरी से होने वाला नुकसान
✔ स्टैक कार्ड और बिलिंग प्रक्रिया में विसंगतियां

को जल्द सुधारने का आग्रह किया गया।

किसानों में बढ़ी बेचैनी — समाधान की उम्मीद प्रशासन से

कई किसान संगठनों ने प्रशासन से अपील की है कि
प्रशासन–वेयरहाउस विवाद जल्द सुलझाया जाए,
ताकि खरीदी प्रक्रिया बिना देरी के सुचारू रूप से शुरू हो सके।

 

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