धर्ममध्य प्रदेश

गाडरवारा में भागवत कथा का तीसरा दिवस भक्तिरस से सराबोर, श्री वसुश्रेष्ठ दास प्रभुजी ने सुनाया तृतीय–चतुर्थ स्कंध का दिव्य वृतांत

तारीख: 23 नवंबर 2025 | स्थान: शांतिनगर कॉलोनी, गाडरवारा

गाडरवारा नगर में पहली बार आयोजित हो रही संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा का तीसरा दिवस आज भक्तिमय वातावरण और आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण रहा। इस पावन कथा का वाचन इस्‍कॉन उज्जैन के संन्यासी एवं इस्कॉन बदनावर के अध्यक्ष, परम पूज्य भागवताचार्य श्री वसुश्रेष्ठ दास प्रभुजी द्वारा किया जा रहा है। कथा का आयोजन श्री ठाकुर सुरेंद्र सिंह जी के निवास स्थान शांतिनगर कॉलोनी में 21 नवंबर से 27 नवंबर तक प्रतिदिन किया जा रहा है।

तृतीय दिवस के प्रमुख प्रसंग: कपिल–देवहूति संवाद, सती कथा और ध्रुव चरित्र ने भाव-विभोर किया

आज के कथा सत्र में प्रभुजी ने भागवत पुराण के तृतीय और चतुर्थ स्कंध का विस्तृत और भावपूर्ण वर्णन किया।
तीसरे दिन भक्तों को तीन प्रमुख और अत्यंत प्रेरणादायी प्रसंग सुनाए गए—

1) कपिल देव – देवहूति संवाद

प्रभुजी ने कपिल भगवान द्वारा माता देवहूति को दिए गए सांख्य योग और भक्ति मार्ग के उपदेशों को सहज ढंग से समझाया। उन्होंने बताया कि आत्मज्ञान, संयम और ईश्वर में निष्ठा जीवन को सार्थक बनाते हैं।

2) सती माता की पावन कथा

सती माता और भगवान शिव से जुड़ा यह प्रसंग श्रद्धालुओं को भावुक कर गया। प्रभुजी ने बताया कि सम्मान, विवेक और मर्यादा की रक्षा के लिए सती माता का त्याग आज भी समाज के लिए प्रेरणा है।

3) बाल ध्रुव का चरित्र

बालक ध्रुव की तपस्या, दृढ़ संकल्प और निष्ठा ने उपस्थित भक्तों के मन में भक्ति-शक्ति का संचार किया। प्रभुजी ने समझाया कि ध्रुव जैसे अनुशासन और लक्ष्य-प्राप्ति का उदाहरण आज भी दुर्लभ है।

नगर में प्रथम बार भागवताचार्य के रूप में पदार्पण, श्रद्धालुओं में उत्साह चरम पर

गाडरवारा में पहली बार वसुश्रेष्ठ दास प्रभुजी का भागवताचार्य के रूप में आगमन स्थानीय भक्तों के लिए सौभाग्य माना जा रहा है। कथा स्थल पर प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचकर प्रभुजी की संगीतमय कथा और हृदयस्पर्शी कीर्तन का आनंद ले रहे हैं।

भक्तों का कहना है कि प्रभुजी का सरल बोलने का अंदाज़ और गूढ़ विषयों को भी सहज रूप से समझाने की कला उन्हें विशेष बनाती है। कथा के दौरान वातावरण “हरे कृष्ण” संकीर्तन से गुंजायमान रहा।

आगे भी जारी रहेगा भक्ति का प्रवाह: 27 नवंबर तक होगा आयोजन

यह आध्यात्मिक आयोजन 21 से 27 नवंबर 2025 तक प्रतिदिन आयोजित होगा। हर शाम भक्तगण एकत्र होकर कथा, भजन और कीर्तन में शामिल हो रहे हैं। आयोजक परिवार ने सभी नगरवासियों से अधिकाधिक संख्या में जुड़ने का आग्रह किया है।

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