नरसिंहपुर का लाल आशीष शर्मा शहीद: बोहानी में उमड़ा जनसैलाब, मुख्यमंत्री सहित हजारों लोगों ने नम आंखों से दी अंतिम विदाई
नक्सली मुठभेड़ में शहीद हॉक फोर्स इंस्पेक्टर आशीष शर्मा को बोहानी में हजारों लोगों ने अंतिम विदाई दी। CM मोहन यादव ने श्रद्धांजलि दी और सहायता का भरोसा दिया।

नरसिंहपुर/गाडरवारा। मध्यप्रदेश की धरती ने एक और वीर सपूत खो दिया। नक्सली मुठभेड़ में हॉक फोर्स के बहादुर इंस्पेक्टर आशीष शर्मा शहीद हो गए। बोहानी गांव का यह बेटा सिर्फ परिवार ही नहीं, पूरे प्रदेश का गर्व था। बुधवार को छत्तीसगढ़–महाराष्ट्र सीमा पर डोंगरगढ़ क्षेत्र में नक्सलियों से हुई भीषण मुठभेड़ में उन्होंने सीने, पेट और पैर में गोली लगने के बावजूद अंतिम सांस तक मोर्चा संभाले रखा और शहादत को गले लगा लिया।

गांव बोहानी में रो पड़ा हर दिल – फूलों की बारिश में घर पहुंचा पार्थिव शरीर
जब शहीद आशीष का पार्थिव शरीर बोहानी पहुंचा, तो पूरे गांव की आंखें नम हो गईं।
घर–घर और गली–गली से लोग निकल पड़े—किसी की आंखों में गर्व था, तो किसी की आंखों में अपार दर्द।

पनारी, कारपगांव सहित मार्ग में दर्जनों गांवों के ग्रामीण और स्कूल के बच्चे सड़क किनारे खड़े होकर शहीद को फूल अर्पित करते रहे। पूरा रास्ता “शहीद आशीष अमर रहें” के नारों से गूंजता रहा।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दी श्रद्धांजलि, शहीद परिवार को हर संभव मदद का भरोसा
प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव स्वयं बोहानी पहुंचे और शहीद के पार्थिव शरीर पर पुष्पचक्र अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी।
उन्होंने भावुक होकर कहा कि—
“मध्यप्रदेश ने एक अमूल्य रत्न खो दिया है। सरकार शहीद परिवार को हर संभव सहयोग देगी।”

इस दौरान प्रदेश सरकार से राव उदयप्रताप सिंह (परिवहन एवं स्कूल शिक्षा मंत्री), प्रहलाद सिंह पटेल (पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री), सांसद दर्शन सिंह चौधरी, तेंदूखेड़ा विधायक विश्वनाथ सिंह पटेल, उमंग सिंघार (नेता प्रतिपक्ष), कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष जीतू पटवारी, गोटेगांव विधायक महेंद्र नागेश तथा वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे।
दो बार वीरता पदक से सम्मानित—शौर्य की मिसाल थे आशीष शर्मा
- वर्ष 2016 बैच के प्लाटून कमांडर
- हॉक फोर्स में इंस्पेक्टर
- भारत सरकार द्वारा दो बार वीरता पदक से सम्मानित
- तीन राज्यों—मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ की संयुक्त नक्सल उन्मूलन टीम के प्रमुख सदस्य
- अदम्य साहस व ऑपरेशनल प्लानिंग में गहरी पकड़

सूत्रों के अनुसार, मुठभेड़ से ठीक पहले नक्सलियों की गतिविधि की सूचना मिलने पर आशीष टीम लेकर जंगल में सर्चिंग पर गए थे, जहां उन पर अचानक गोलीबारी हुई।
परिवार पर टूटा दुख का पहाड़—जनवरी में होनी थी शादी
आशीष शर्मा के पिता देवेन्द्र शर्मा किसान हैं।
उनका छोटा भाई भोपाल में पढ़ाई करता है।
सबसे भावुक कर देने वाली बात यह रही कि जनवरी में उनकी शादी होने वाली थी।
परिजनों और गांव के लोगों ने बताया कि आशीष बचपन से ही बहादुर, विनम्र और कर्तव्य के प्रति समर्पित थे।
राजकीय सम्मान के साथ हुआ अंतिम संस्कार

बोहानी में हजारों की भीड़ उमड़ आई।
जवानों की टुकड़ी ने राजकीय सम्मान के साथ सलामी दी।
अंतिम संस्कार के समय पूरे वातावरण में सिर्फ एक ही स्वर गूंज रहा था—
“शहीद आशीष शर्मा… अमर रहें!”







