मध्य प्रदेशस्वास्थ्य

Narsinghpur News: नरसिंहपुर में स्क्रब टाइफस के तीन मरीज मिले — चूहों से फैलती खतरनाक बीमारी, स्वास्थ्य विभाग ने जारी की एडवायजरी

Narsinghpur News: नरसिंहपुर जिले में स्क्रब टाइफस के 3 मरीज मिले। चूहों और माइट्स से फैलने वाली यह खतरनाक बीमारी गंभीर रूप ले सकती है। स्वास्थ्य विभाग ने एडवायजरी जारी की और सतर्कता बढ़ाई।

Narsinghpur | Madhya Pradesh Health Alert: नरसिंहपुर जिले में चूहों से फैलने वाली संक्रामक बीमारी स्क्रब टाइफस (Scrub Typhus) ने दस्तक दे दी है। स्वास्थ्य विभाग ने तीन ग्रामीण मरीजों में इस बीमारी की पुष्टि की है। विभाग ने इसे गंभीर मानते हुए नागरिकों को सावधानी बरतने और संक्रमण से बचाव के लिए एडवायजरी जारी की है।

क्या है स्क्रब टाइफस?

स्क्रब टाइफस एक खतरनाक बैक्टीरियल संक्रमण है, जो मुख्य रूप से रोडेंट (चूहों) पर रहने वाले संक्रमित घून (माइट्स) के काटने से फैलता है। यह संक्रमण शरीर में ओरिएंटिया सुट्सुगामुशी (Orientia tsutsugamushi) नामक बैक्टीरिया के जरिए फैलता है।

इस बीमारी के लक्षण साधारण वायरल फीवर जैसे दिखते हैं, इसलिए लोग अक्सर इसे सामान्य बुखार समझकर अनदेखा कर देते हैं — यही इसकी सबसे बड़ी खतरे की वजह है।

जिले में तीन मरीजों की पुष्टि

जिला महामारी विशेषज्ञ डॉ. गुलाब खातरकर के अनुसार, अब तक तीन ग्रामीण मरीजों में स्क्रब टाइफस की पुष्टि हुई है।

  • पहला मामला साईखेड़ा क्षेत्र का है, जहां एक ग्रामीण खेत में बने मकान में रहता था। चूहों की बीट और घास-फूस के संपर्क में आने से संक्रमण फैलने की संभावना जताई जा रही है।
  • दूसरा मरीज झामर गांव (नरसिंहपुर तहसील) का है। यह व्यक्ति अपने घर के आसपास की घास की सफाई करते समय संक्रमित हुआ।
  • तीसरा मामला करेली तहसील से आया है।

तीनों मरीजों को तत्काल स्वास्थ्य विभाग की देखरेख में भर्ती किया गया है और इलाज प्रोटोकॉल के अनुसार उपचार जारी है।

21 से 28 दिनों में दिखते हैं लक्षण

डॉ. खातरकर ने बताया कि स्क्रब टाइफस का संक्रमण व्यक्ति में 21 से 28 दिन में दिखाई देता है। इसके लक्षण साधारण बुखार जैसे होते हैं, लेकिन धीरे-धीरे शरीर को गंभीर रूप से प्रभावित करते हैं।

मुख्य लक्षण:

  • लगातार तेज बुखार
  • सिरदर्द और शरीर में दर्द
  • मांसपेशियों में अकड़न
  • सूखी खांसी और थकान
  • शरीर पर दाने या काले निशान (घून के काटने वाली जगह पर)
  • गंभीर मामलों में निमोनिया या मस्तिष्क ज्वर (मेनिनजाइटिस) भी हो सकता है।

ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ा खतरा

नरसिंहपुर का बड़ा हिस्सा ग्रामीण और कृषि प्रधान है। खेतों में काम करने वाले किसान, मजदूर और चरवाहे इस बीमारी के उच्च जोखिम वाले समूह में आते हैं। चूहे और घास के झुरमुटों में रहने वाले माइट्स इस संक्रमण के प्रमुख वाहक हैं।

स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि सफाई की कमी, झाड़ियों और कचरे का जमाव, तथा पशुओं के संपर्क के कारण यह बीमारी तेजी से फैल सकती है।

स्वास्थ्य विभाग की एडवायजरी — ऐसे करें बचाव

नागरिकों को संक्रमण से बचाव के लिए निम्नलिखित उपाय अपनाने की सलाह दी है:

  1. खेत, जंगल या झाड़ियों में जाते समय फुल स्लीव्स कपड़े और पूरी टांग ढकने वाले कपड़े पहनें
  2. रिपलेंट क्रीम या कीटनाशक स्प्रे का प्रयोग करें।
  3. घास-फूस या झाड़ियों में बैठने या सोने से बचें।
  4. घर और आसपास की सफाई बनाए रखें, कचरा जमा न होने दें।
  5. चूहों की रोकथाम के लिए जाल या जहर का उपयोग करें।
  6. अनाज को सुरक्षित स्थान पर रखें, ताकि उस पर चूहों का संपर्क न हो।
  7. शरीर पर जले जैसा निशान या लगातार बुखार दिखे तो तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र जाएं।

जागरूकता अभियान के निर्देश

स्वास्थ्य विभाग ने सभी आशा, आंगनवाड़ी और ग्राम स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को गांव-गांव जाकर बीमारी की जानकारी फैलाने के निर्देश दिए हैं।

“यदि किसी व्यक्ति में तेज बुखार, सिरदर्द, दाने या काले निशान जैसे लक्षण दिखें तो उसे तुरंत अस्पताल पहुंचाएं। शुरुआती उपचार से गंभीर स्थिति से बचा जा सकता है।”
डॉ. गुलाब खातरकर, जिला महामारी विशेषज्ञ, नरसिंहपुर

प्रशासन की सतर्कता और निगरानी

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. मनीष मिश्रा ने जिले के सभी स्वास्थ्य केंद्रों को निर्देश दिए हैं कि

  • स्क्रब टाइफस के लक्षण दिखने वाले मरीजों की फौरन जांच की जाए,
  • रैपिड डायग्नोस्टिक टेस्ट (RDT) किट का उपयोग किया जाए,
  • और संक्रमण के संदिग्ध क्षेत्रों में स्प्रे अभियान चलाया जाए।

जनजागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव

स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि स्क्रब टाइफस से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय स्वच्छता और सावधानी है।
यह बीमारी आमतौर पर मानव-से-मानव नहीं फैलती, बल्कि संक्रमित घून के काटने से होती है, इसलिए प्राकृतिक और कृषि क्षेत्रों में काम करने वाले लोगों को विशेष सतर्कता बरतने की आवश्यकता है।

 

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