लाड़ली बहना योजना पर मंत्री विजय शाह का बयान: CM के सम्मान में नहीं आईं तो जांच होगी? सरकार करोडों रूपये दे रही है..
रतलाम में मंत्री विजय शाह का विवादित बयान— लाड़ली बहना योजना की लाभार्थी महिलाएं CM के सम्मान में नहीं आईं तो जांच पेंडिंग करने की चेतावनी। जानिए पूरा मामला।

मध्यप्रदेश राजनीति।
मध्यप्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी लाड़ली बहना योजना एक बार फिर राजनीतिक विवाद के केंद्र में आ गई है। रतलाम में आयोजित जिला विकास सलाहकार समिति की बैठक के दौरान प्रदेश के प्रभारी मंत्री डॉ. विजय शाह ने मंच से ऐसा बयान दिया, जिसे विपक्ष और सामाजिक संगठनों ने दबाव, धमकी और सत्ता के दुरुपयोग के रूप में देखा है।
मंत्री विजय शाह ने साफ शब्दों में कहा कि जब सरकार करोड़ों रुपए की आर्थिक सहायता दे रही है, तो लाड़ली बहनों का मुख्यमंत्री के सम्मान कार्यक्रम में आना “नैतिक जिम्मेदारी” है। उन्होंने यहां तक कह दिया कि जो महिलाएं कार्यक्रम में नहीं आएंगी, उनकी जांच पेंडिंग कर दी जाएगी।
“करोड़ों दे रहे हैं, तो धन्यवाद बनता है” — मंत्री का तर्क
बैठक के दौरान मंत्री ने महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारी से रतलाम जिले में लाड़ली बहनों की संख्या पूछी। जवाब मिला— करीब ढाई लाख महिलाएं।
इस पर मंत्री बोले—
“मुख्यमंत्री को दो साल हो गए हैं। ढाई लाख में से कम से कम 50 हजार बहनें तो सम्मान करने आनी चाहिए।”
मंत्री ने आगे कहा कि सरकार ₹1500 प्रति माह की राशि दे रही है, यानी साल भर में करोड़ों रुपए ट्रांसफर हो रहे हैं, तो
“दो साल में एक बार धन्यवाद तो बनता है।”
“नहीं आईं तो जांच करेंगे” — बयान जिसने बढ़ाया विवाद
मंत्री का सबसे विवादास्पद बयान तब आया, जब उन्होंने कहा—
“जिनके ढाई-ढाई सौ बढ़ रहे हैं, उनकी जांच करेंगे।
किसी का आधार लिंक नहीं होगा तो जांच थोड़ी पेंडिंग कर देंगे।
मतलब वो पेंडिंग हो ही जाएंगी… फिर सब आएंगी।”
इस बयान के बाद बैठक में मौजूद अधिकारी और जनप्रतिनिधि असहज और चुप नजर आए। कई लोगों ने इसे सीधे तौर पर योजना का राजनीतिक इस्तेमाल बताया।
लाड़ली बहना योजना: आंकड़ों में सच्चाई
- प्रदेश में कुल लाभार्थी महिलाएं: करीब 1.27 करोड़
- मासिक सहायता राशि: ₹1500
- पहले राशि थी: ₹1250
- भाईदूज 2024 पर बढ़ाकर ₹1500 की गई
- राशि DBT के माध्यम से सीधे खातों में ट्रांसफर
विशेषज्ञों का कहना है कि यह योजना कल्याणकारी है, लेकिन लाभ के बदले राजनीतिक सहभागिता की अपेक्षा संवैधानिक मूल्यों पर सवाल खड़े करती है।
“मजाक बना रखा है क्या?” — बैठक में दूसरा हाई-वोल्टेज ड्रामा
इसी बैठक में एक और विवाद खड़ा हो गया। अक्षय ऊर्जा विभाग ने प्रेजेंटेशन के लिए एक मैकेनिक को भेज दिया, जिस पर मंत्री विजय शाह भड़क गए।
मंत्री ने कहा—
“मजाक बना रखा है क्या?
मंत्री और विधायक बैठे हैं और मैकेनिक भेज दिया!
यहां से जाओ, वरना मेरे मुंह से अपशब्द निकल जाएंगे।”
मंत्री ने इसे विभागीय अनुशासनहीनता बताते हुए अपने पीए को मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव को पत्र लिखने के निर्देश दिए।
विवादों से पुराना नाता: डॉ. विजय शाह
डॉ. विजय शाह का नाम पहले भी कई बार विवादों में आ चुका है—
विद्या बालन विवाद (नवंबर 2023)
अभिनेत्री विद्या बालन द्वारा रात में मिलने से इनकार करने पर, कथित तौर पर वन विभाग के जरिए फिल्म की शूटिंग रुकवाने का आरोप।
राहुल गांधी पर टिप्पणी (सितंबर 2022)
राहुल गांधी की शादी को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी, जिस पर काफी राजनीतिक बवाल हुआ।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं तेज
मंत्री के इस बयान पर विपक्ष ने इसे लोकतंत्र और महिला सम्मान के खिलाफ बताया है। कांग्रेस और अन्य दलों का कहना है कि
“सरकारी योजनाएं अधिकार हैं, एहसान नहीं।”
वहीं, सोशल मीडिया पर भी यह मुद्दा तेजी से वायरल हो रहा है और लोग पूछ रहे हैं—
क्या सरकारी सहायता लेने के बदले राजनीतिक कार्यक्रमों में उपस्थिति अनिवार्य की जा सकती है?







