मध्य प्रदेशमनोरंजन

कृष्ण कुटी में हुई साहित्य संध्या: साहित्यकार व अभिनेता आशुतोष राणा के सानिध्य में शब्दों की महफिल सजाई

गाडरवारा के कृष्ण कुटी में आशुतोष राणा की मौजूदगी में साहित्य संध्या का आयोजन। कवियों, साहित्यकारों और कलाकारों की शानदार प्रस्तुतियों ने मन मोह लिया।

गाडरवारा। शांति नगर स्थित कृष्ण कुटी में क्षेत्र के गौरव, ख्यातिलब्ध साहित्यकार और फिल्म अभिनेता आशुतोष राणा के निवास पर शक्कर के दाने ग्रुप द्वारा भव्य साहित्य संध्या का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता स्वयं आशुतोष राणा ने की।

साहित्यिक संध्या में पूर्व विधायक श्रीमती साधना स्थापक, वरिष्ठ साहित्यकार कुशलेन्द्र श्रीवास्तव, नगर पालिका अध्यक्ष शिवाकांत मिश्रा, तथा अनिल लूनावत सहित अनेक साहित्यप्रेमी मौजूद रहे।

आशुतोष राणा की शायराना प्रस्तुति

कार्यक्रम की मुख्य आकर्षण रही आशुतोष राणा की शायराना अभिव्यक्ति। उन्होंने कहा—
“परखिए मत, परखने में कोई अपना नहीं होता…
किसी भी आईने में चेहरा देर तक नहीं रहता…
बड़े लोगों से मिलने में जरा सा फासला रखना…
जहाँ दरिया समुंदर से मिला, दरिया नहीं रहता…”

इसके साथ ही उन्होंने 40 वर्ष पूर्व पुरानी गल्ला मंडी में आयोजित होने वाली रामलीला की यादें भी साझा कीं और संवादों को दोहराया, जिसे श्रोताओं ने खूब सराहा।

साहित्यकारों की शानदार प्रस्तुतियाँ

  • पूर्व विधायक साधना स्थापक ने अनोखे अंदाज़ में कहा—
    “मित्र बनाओ परछाई और आईने जैसे—परछाई साथ कभी नहीं छोड़ेगी और आईना झूठ नहीं बोलता।”
  • व्यंग्यकार कुशलेन्द्र श्रीवास्तव ने अपना प्रसिद्ध व्यंग्य “ईमानदार प्रत्याशी की तलाश” सुनाकर खूब हँसी बटोरी।
  • सूफियाना फनकार मनीष शुक्ला ने गीत “राम तेरी गंगा मैली हो गई…” प्रस्तुत कर समा बाँध दिया।
  • करेली के युवा कवि अमित जैन संजय ने अपनी काव्यकृति “पन्नों फटी किताब” आशुतोष राणा को भेंट की और देशभक्ति कविता पढ़ी।
  • स्तुति सोनी ने कविता “हे भारत के राम जगो, मैं तुम्हें जगाने आया हूँ” की अद्भुत प्रस्तुति की।
  • अनिल लूनावत ने भी प्रभावी शायरी से संध्या को सजाए रखा।

नरसिंहपुर, करेली तथा आसपास के क्षेत्रों से आए साहित्यकारों ने अपनी रचनाओं से महफिल लूट ली।

कार्यक्रम संचालन व आयोजन

कार्यक्रम का संचालन चंद्रकांत शर्मा ने किया। उन्होंने बताया कि शक्कर के दाने परिवार द्वारा समय–समय पर कृष्ण कुटी में साहित्यिक संगोष्ठियाँ आयोजित की जाती रही हैं।

साहित्यिक संध्या देर रात तक चली और आयोजन की सभी ने सराहना की।

 

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