कंचन सिंह ठाकुर का ‘कानून का प्रहार’ – करोड़ों की ठगी को किया बेनकाब

संवाददाता राकेश पटेल इक्का
नर्मदापुरम शहर में वित्तीय धोखाधड़ी के मामले में नर्मदापुरम पुलिस ने बड़ा खुलासा किया, और इसके केंद्र में रही थाना प्रभारी निरीक्षक कंचन सिंह ठाकुर। उनके सतर्क नेतृत्व, तेज निर्णय क्षमता और सूक्ष्म विवेचना ने करोड़ों की निवेश धोखाधड़ी को जड़ से उखाड़ दिया।
RCC मॉल से संचालित Profit Bulls नामक फर्म के जरिए आरोपी अपचारी और उसकी माँ कसीदा बानो मासिक 15% तक का दिखावटी मुनाफा देने का लालच देकर भोले-भाले निवेशकों से 32,37,000 रुपये ऐंठ रहे थे। शुरुआती महीनों में मुनाफा दिखाकर दोनों आरोपी शहर से फरार हो गए।
शिकायत मिलने पर प्रकरण धारा 318(4) के तहत पंजीकृत किया गया। निरीक्षक कंचन सिंह ठाकुर ने मामले की पूरी जिम्मेदारी संभाली। उनकी पैनी निगाह, टीम के साथ समन्वय और निरंतर कार्यशैली के चलते आरोपियों तक पुलिस पहुंचने में सफल रही।
26 नवंबर 2025 को अपचारी को अभिरक्षा में लिया गया, जबकि उसकी माँ को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया। न्यायालय के निर्देश पर बाल अपचारी को बाल सुधार गृह भेजा गया और अन्य आरोपी जेल भेजे गए।
इस कार्रवाई में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अभिषेक राजन, अनुविभागीय अधिकारी जितेन्द्र पाठक और टीम के सदस्य अनुज बघेल, रितेश यदुवंशी, पंकज यादव, रवि कुशवाह, प्रतीक्षा रघुवंशी और हरीश डिगरसे ने अहम भूमिका निभाई।
फिर भी, संचालन, विवेचना और सफलता की मुख्य डोर जिस दृढ़ता से थामी, वह रही निरीक्षक कंचन सिंह ठाकुर। उनके नेतृत्व, अनुशासन और न्यायप्रिय दृष्टिकोण ने इस पूरे प्रकरण को न केवल अपराधियों के लिए सख्त संदेश बल्कि आम नागरिकों के विश्वास को मजबूत करने वाली घटना बना दिया।
नर्मदापुरम जैसे संवेदनशील जिले में केंद्रीय थाना कोतवाली की कमान संभालते हुए कंचन सिंह ठाकुर ने साबित किया कि नेतृत्व पद से नहीं, कर्म और निष्ठा से पहचाना जाता है। उनकी कार्यशैली ने जनता का भरोसा और उम्मीदें नई ऊँचाइयों तक पहुंचा दी हैं।
नर्मदापुरम की जनता की ओर से उन्हें ढेरों शुभकामनाएँ—उनकी तैनाती न केवल नई शुरुआत है, बल्कि बेहतर और भरोसेमंद पुलिसिंग की उम्मीदों का मजबूत आधार भी है।







