सुपोषण दिवस पर गाडरवारा-साईंखेड़ा में संयुक्त निरीक्षण: गर्भवती महिलाओं को चिकित्सा परामर्श, बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण

गाडरवारा/साईंखेड़ा। सुपोषण दिवस के अवसर पर महिला बाल विकास विभाग और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त टीम ने आज विकासखंड साईंखेड़ा एवं गाडरवारा क्षेत्र के कई आंगनबाड़ी केंद्रों का विस्तृत निरीक्षण किया। यह संयुक्त भ्रमण कलेक्टर के निर्देशन में किया गया, जिसका उद्देश्य गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं और बच्चों की स्वास्थ्य एवं पोषण संबंधी स्थिति का आकलन करना था।
डॉक्टरों और अधिकारियों की उपस्थिति
संयुक्त निरीक्षण में शामिल रहे—
- डॉ. शिप्रा कौरव, बीएमओ साईंखेड़ा
- श्रीमती उमा बर्मन, परियोजना अधिकारी, महिला एवं बाल विकास साईंखेड़ा
- पर्यवेक्षक पूनम ठाकुर
- एएनएम उषा
- सहायक कर्मी एवं आंगनवाड़ी स्टाफ
इन वार्डों एवं क्षेत्रों में हुआ निरीक्षण
- गांधी वार्ड, गाडरवारा
- राधा वल्लभ वार्ड, गाडरवारा
- शास्त्री वार्ड, गाडरवारा
यहां सुपोषण दिवस के तहत चल रही गतिविधियों का अवलोकन किया गया, जिसमें टीकाकरण, पोषण आहार वितरण, स्वास्थ्य परीक्षण और पंजीयन शामिल थे।
गर्भवती महिलाओं को मिला विशेष चिकित्सकीय परामर्श
बीएमओ डॉ. शिप्रा कौरव ने उपस्थित गर्भवती एवं हाई-रिस्क माताओं को—
- उचित खान-पान
- सप्लीमेंट सेवन
- नियमित जांच
- प्रसव पूर्व सावधानियां
के बारे में विस्तार से सलाह दी। साथ ही बच्चों को निर्धारित कैलेंडर के अनुसार टीके लगाए गए।
महिला बाल विकास विभाग ने समझाई योजनाओं की जानकारी
परियोजना अधिकारी उमा बर्मन ने महिलाओं को विभाग की प्रमुख योजनाओं के बारे में जानकारी दी, जिनमें—
- लाडली लक्ष्मी योजना
- प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना
- उषा किरण योजना
- पूरक पोषण आहार
- आंगनबाड़ी सेवाएं
शामिल थीं। उन्होंने समय पर पंजीयन, गर्भवती की अनिवार्य जांच, पोषण आहार प्राप्ति तथा संदर्भ सेवाओं की आवश्यकता पर जोर दिया।
बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण व पोषण मूल्यांकन
संयुक्त टीम ने सभी बच्चों का—
- वजन
- ऊंचाई
- पोषण स्थिति
- स्वास्थ्य संबंधी लक्ष्ण
की जांच की और माताओं को पोषण सुधार के लिए आवश्यक परामर्श दिया।
कलेक्टर के निर्देश पर हो रहा सतत निरीक्षण
सुपोषण दिवस को अधिक प्रभावी बनाने के लिए जिला प्रशासन द्वारा नियमित रूप से स्वास्थ्य एवं महिला बाल विकास विभाग को संयुक्त निरीक्षण के निर्देश दिए गए हैं। इसका उद्देश्य कुपोषण को कम करना और मातृ-शिशु स्वास्थ्य को मजबूत करना है।







