मध्य प्रदेश

श्री साईं श्रद्धा सेवा समिति की ऐतिहासिक पहल: डमरूघाटी में चढ़ी हरित सामग्री से बनेगी जैविक खाद

गाडरवारा। गाडरवारा स्थित शिवधाम डमरू घाटी में महाशिवरात्रि पर तीन दिवसीय भव्य महोत्सव के दौरान लाखों श्रद्धालुओं ने भगवान शिव के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। मेले में जहां आस्था और उत्साह का अद्भुत संगम देखने को मिला, वहीं पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक अनुकरणीय पहल भी सामने आई।

समाजसेवी संगठन श्री साईं श्रद्धा सेवा समिति ने लगातार दूसरे वर्ष हरित सामग्री के पुनः उपयोग की ऐतिहासिक पहल को आगे बढ़ाया।

हरित सामग्री से बनेगी कॉम्पोस्ट खाद

महाशिवरात्रि पर श्रद्धालुओं द्वारा भगवान शिव को अर्पित बेलपत्र, फूल, धतूरा, दूवा आदि हरित सामग्री पूर्व में विसर्जित कर दी जाती थी। लेकिन वर्ष 2024 से समिति की पहल पर इस सामग्री को अलग से एकत्रित कर जैविक खाद (कॉम्पोस्ट) तैयार की जा रही है।

इस वर्ष समिति संस्थापक आशीष राय के नेतृत्व में करीब पांच क्विंटल हरित सामग्री संग्रहित की गई। इसे नगर पालिका श्मशान घाट स्थित प्लांट में प्रोसेस कर खाद तैयार की जाएगी, जिसका उपयोग शहर के धार्मिक स्थलों पर लगे पेड़-पौधों में किया जाएगा।

यह पहल न केवल पर्यावरण संरक्षण का संदेश देती है, बल्कि धार्मिक आस्था को स्वच्छता और सतत विकास से जोड़ने का भी कार्य कर रही है।

डमरूघाटी समिति ने की सराहना

डमरूघाटी समिति अध्यक्ष हंसराज मालपानी, उपाध्यक्ष रवि शेखर जायसवाल, सचिव चंद्रकांत शर्मा और कोषाध्यक्ष जिनेश जैन सहित अन्य सदस्यों ने इस कार्य की सराहना करते हुए कहा कि साईं समिति की यह पहल देश के अन्य धार्मिक स्थलों के लिए भी प्रेरणास्रोत बन सकती है।

15 वर्षों से स्वच्छता सेवा का संकल्प

महाशिवरात्रि मेले में नंदी प्रांगण की स्वच्छता व्यवस्था का जिम्मा श्री साईं श्रद्धा सेवा समिति पिछले करीब 15 वर्षों से निभा रही है।

इस वर्ष भी समिति ने:

  • हरित सामग्री का पृथक्करण
  • अगरबत्ती पैकेट, नारियल बूछों व अन्य कचरे की सफाई
  • स्वच्छता के प्रति जनजागरण अभियान

जैसी गतिविधियों को सफलतापूर्वक अंजाम दिया।

इन सदस्यों का रहा विशेष सहयोग

इस अवसर पर आशीष राय, बबलू दवाईवाला, धनराज यादव, चेतन विश्वकर्मा, अमित कोरी, राहुल रजक, नमन शुक्ला, राजा अहिरवार, यश कुर्मी, लकी रजक, मोहित सोनी, आदर्श विश्वकर्मा, सूर्या चौहान, कोमल वर्मा, ओम राजपूत, आशीष कुशवाहा, यश कुशवाहा, हरिओम श्रीवास, राज कुमार, आकाश यादव, चंदन गोलंदाज, चिराग चौहान सहित अनेक सदस्यों का विशेष योगदान रहा।

आस्था के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश

डमरूघाटी में शुरू हुई यह पहल यह साबित करती है कि धार्मिक आयोजनों को पर्यावरण के अनुकूल बनाकर स्वच्छता और हरित विकास की दिशा में ठोस कदम उठाए जा सकते हैं।

गाडरवारा का यह मॉडल अब अन्य धार्मिक स्थलों के लिए भी एक उदाहरण बनता जा रहा है।

WhatsApp Group Join Now
Telegram Group Join Now

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!