गणतंत्र दिवस रिहर्सल में वरिष्ठ अधिकारियों की घोर लापरवाही, राष्ट्रीय गरिमा से खुला खिलवाड़
ढीली मुद्रा, औपचारिकता और उदासीन रवैये ने उठाए प्रशासनिक जवाबदेही पर गंभीर सवाल, कार्रवाई की उठी मांग

संवाददाता राकेश पटेल इक्का
नर्मदापुरम।
26 जनवरी गणतंत्र दिवस जैसे सर्वोच्च राष्ट्रीय पर्व से पूर्व आयोजित अंतिम रिहर्सल में वरिष्ठ अधिकारियों की घोर लापरवाही और अनुशासनहीनता सामने आई है, जिसने न केवल आयोजन की गरिमा को ठेस पहुंचाई, बल्कि प्रशासनिक संवेदनशीलता पर भी बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है।
पुलिस परेड ग्राउंड में आयोजित रिहर्सल के दौरान जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी हिमांशु जैन द्वारा ध्वज फहराया गया, लेकिन इस दौरान उनका ढीला, उदासीन और गैर-जिम्मेदाराना हाव-भाव देशभक्ति के माहौल के बिल्कुल विपरीत नजर आया। न तो सावधान मुद्रा, न ही अनुशासित सलामी, और न ही आंखों में राष्ट्रीय पर्व के अनुरूप गंभीरता दिखाई दी।
जब बच्चे अनुशासन में, अधिकारी औपचारिकता में
एक ओर स्कूली बच्चे और परेड दल के जवान कड़ी मेहनत, अनुशासन और देशभक्ति के जज़्बे के साथ मार्च-पास्ट और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की रिहर्सल कर रहे थे, वहीं दूसरी ओर वरिष्ठ अधिकारी का ढीला रवैया पूरे आयोजन की छवि पर पानी फेरता नजर आया।
अनुभवी पत्रकारों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि राष्ट्रीय पर्व किसी औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि देश की आत्मा से जुड़ा अवसर होता है। ऐसे मौके पर वरिष्ठ अधिकारी यदि केवल “पद निभाने” की मुद्रा में दिखें, तो यह न केवल बच्चों और जवानों का मनोबल गिराता है, बल्कि प्रशासन की सोच को भी उजागर करता है।

कारण बताओ नोटिस और अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग
इस गंभीर लापरवाही को लेकर कलेक्टर और जिला प्रशासन से मांग की जा रही है कि संबंधित अधिकारी पर तत्काल कारण बताओ नोटिस जारी किया जाए और भविष्य में इस तरह की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
राष्ट्रीय पर्व दिखावा नहीं, जिम्मेदारी है
यह रिहर्सल साफ संदेश देती है कि केवल कुर्सी और पद से राष्ट्रभक्ति सिद्ध नहीं होती, बल्कि आचरण, अनुशासन और भावनात्मक जुड़ाव अनिवार्य है। यदि ऐसे मामलों को नजरअंदाज किया गया, तो यह राष्ट्रीय पर्वों की गरिमा पर स्थायी कलंक बन सकता है।







