मध्य प्रदेशशिक्षा/नौकरी

पथरई गांव के चार युवाओं ने इंडियन सिलेक्शन में रचा इतिहास

दो सगे भाई और एक चाचा का बेटा भी चयनित, मेहनत, अनुशासन और सही मार्गदर्शन की मिसाल बनी सफलता

संवाददाता राकेश पटेल इक्का

सोहागपुर (नर्मदापुरम)। छोटे से ग्राम पथरई से निकले चार युवाओं ने इंडियन सिलेक्शन में सफलता हासिल कर न केवल अपने परिवारों का बल्कि पूरे क्षेत्र का नाम गौरवान्वित किया है। अमित मलवीय, आदित्य मलवीय, शिवराज मलवीय और प्रेमकुमार पटेल—इन चारों युवाओं ने निरंतर परिश्रम, आत्मअनुशासन और दृढ़ संकल्प के बल पर यह महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है।

इस सफलता को और भी विशेष बनाता है यह तथ्य कि चयनित युवाओं में दो सगे भाई और एक चाचा का बेटा भी शामिल है। एक ही परिवार से तीन युवाओं का चयन होना यह दर्शाता है कि सकारात्मक वातावरण, पारिवारिक सहयोग और स्पष्ट लक्ष्य के साथ किया गया प्रयास निश्चित रूप से रंग लाता है।

इन युवाओं के मार्गदर्शक, वरिष्ठ पत्रकार एवं समाजसेवी राकेश एक्का ने इसे अपने जीवन के सबसे संतोषजनक क्षणों में से एक बताया। उन्होंने कहा कि उन्होंने हमेशा अपने विद्यार्थियों को केवल एक ही मूल मंत्र दिया—मेहनत और धैर्य। “सफलता एक दिन में नहीं मिलती, लेकिन अगर लगातार मेहनत की जाए तो एक दिन सफलता जरूर मिलती है। यही बात मैंने इन बच्चों को सिखाई और उन्होंने उसे अपने जीवन में उतारकर दिखा दिया,” उन्होंने कहा।

राकेश एक्का ने यह भी बताया कि उन्हें आज भी बनखेड़ी की तत्कालीन तहसीलदार अंजू लोधी के शब्द स्मरण हैं, जिन्होंने कहा था—“एक दिन में सफलता नहीं मिलती, लेकिन एक दिन जरूर मिलती है।” यही संदेश उन्होंने इन युवाओं को दिया, जिसने कठिन समय में उन्हें संबल और दिशा प्रदान की।

चयनित युवाओं का कहना है कि उनके मार्गदर्शक का सरल स्वभाव, स्पष्ट सोच और निरंतर प्रेरणा उनके लिए सबसे बड़ा संबल रही। उन्होंने बताया कि अनुशासन, समय प्रबंधन और निरंतर अभ्यास को उन्होंने अपने जीवन का हिस्सा बनाया, जिसका परिणाम आज सबके सामने है।

ग्राम पथरई में जैसे ही इस सफलता की सूचना पहुंची, पूरे गांव में हर्ष और गर्व का वातावरण बन गया। ग्रामीणों ने इसे गांव के लिए ऐतिहासिक क्षण बताया। बुजुर्गों से लेकर युवाओं तक, हर कोई इन चारों की उपलब्धि को आने वाली पीढ़ी के लिए प्रेरणा मान रहा है।

यह उपलब्धि केवल चार युवाओं की व्यक्तिगत सफलता नहीं है, बल्कि यह इस बात का सशक्त उदाहरण है कि ग्रामीण अंचलों से निकलकर भी राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई जा सकती है। सही मार्गदर्शन, अनुशासन और निरंतर मेहनत के साथ किसी भी लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है—पथरई गांव के ये चार युवा आज इसी सच्चाई के जीवंत प्रतीक बनकर सामने आए हैं।

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