100 क्विंटल से अधिक स्लॉट बुक न होने से किसान बेहाल, सरकार की नाकामी से धान खरीदी ठप
नरसिंहपुर में 100 क्विंटल से अधिक धान की स्लॉट बुकिंग न होने से किसान परेशान। सरकार की नाकाम नीति से धान खरीदी ठप, किसानों में बढ़ा आक्रोश।

सालीचौका, नरसिंहपुर | अवधेश चौकसे।
मध्यप्रदेश में खुद को जनहितैषी बताने वाली सरकार की नीतियां अब किसानों के लिए अभिशाप बनती नजर आ रही हैं। सालीचौका क्षेत्र सहित पूरे नरसिंहपुर जिले में किसान इन दिनों सबसे अधिक परेशान हैं। कभी यूरिया खाद के लिए लंबी लाइन, तो कभी धान बेचने के लिए स्लॉट बुकिंग की मार—किसान हर मोर्चे पर सरकार की अव्यवस्थाओं का शिकार हो रहा है।
अन्नदाता ही सबसे ज्यादा अपमानित
भगवान के बाद यदि किसी को विधाता कहा जाता है तो वह किसान है, लेकिन हकीकत यह है कि आज वही किसान
- खाद के लिए लाइन में खड़ा है
- अपनी मेहनत की फसल बेचने के लिए लाइन में खड़ा है
- और सबसे ज्यादा अपमान, परेशानी और शोषण झेल रहा है
सरकार की नीतियों ने किसान को अन्नदाता से भिखारी बना दिया है।
100 क्विंटल से ऊपर सिस्टम ने रोकी धान खरीदी
धान खरीदी में सरकार द्वारा लागू की गई स्लॉट बुकिंग व्यवस्था किसानों के लिए नई मुसीबत बन गई है। किसानों का कहना है कि जिनकी उपज 100 क्विंटल से अधिक है, उनके स्लॉट सॉफ्टवेयर द्वारा गलत तरीके से अधिक मात्रा बताकर बुक ही नहीं हो रहे।
नतीजा यह है कि किसान मंडियों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन उनकी फसल खरीदी नहीं हो पा रही।
सरकार खुद पैदा कर रही नई समस्याएं
किसानों का आरोप है कि सरकार एक समस्या का समाधान करने के बजाय नई-नई समस्याएं खड़ी कर रही है।
धान तैयार है, किसान बेचने को तैयार है, लेकिन सरकार का सिस्टम ही किसानों के खिलाफ खड़ा है।
“ज्यादा परेशान किया तो किसान भी सबक सिखाएगा”
किसानों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। किसानों का साफ कहना है कि—
अगर हमने ठान लिया, तो सरकार को बता देंगे कि उसने किसानों को कितना परेशान किया है।
अधिकारी भी बेबस, ऊपर से आ रही दिक्कत
जब इस संबंध में नरसिंहपुर फूड ऑफिस के अधिकारी सौरव राय से बात की गई तो उन्होंने साफ कहा कि—
यह समस्या ऊपर से आ रही है। हमने लिखित में अवगत करा दिया है।
लेकिन हैरानी की बात यह है कि चार–पांच दिन बीत जाने के बाद भी किसानों के स्लॉट बुक नहीं हो रहे, जिससे यह साफ जाहिर होता है कि शासन-प्रशासन किसानों की परेशानी को लेकर गंभीर नहीं है।
कलेक्टर और मुख्यमंत्री से फिर गुहार
किसानों ने जिला कलेक्टर और प्रदेश के मुखिया से पुनः निवेदन किया है कि—
- 100 क्विंटल की सीमा को तत्काल बढ़ाया जाए
- स्लॉट बुकिंग प्रणाली को सुचारू किया जाए
- ताकि किसान अपनी मेहनत की फसल बेच सकें
यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो यह असंतोष बड़े आंदोलन का रूप ले सकता है।







