मध्य प्रदेश

सोहागपुर को जिला बनाने की मांग तेज: ऐतिहासिक अधिकार, प्रशासनिक क्षमता और सतपुड़ा की ताकत के साथ मजबूत दावेदारी

संवाददाता राकेश पटेल इक्का

सोहागपुर (नर्मदापुरम)। नर्मदापुरम जिले की सबसे बड़ी और ऐतिहासिक तहसील सोहागपुर को जिला बनाने की मांग अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचती दिख रही है। सामाजिक कार्यकर्ता राकेश एक्का के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने एसडीएम को औपचारिक ज्ञापन सौंपकर स्पष्ट किया कि यह केवल भावनात्मक आग्रह नहीं, बल्कि ऐतिहासिक अधिकार, प्रशासनिक आवश्यकता और विकासात्मक औचित्य पर आधारित मांग है।

ज्ञापन में कहा गया कि यदि शासन संतुलित क्षेत्रीय विकास और प्रशासनिक दक्षता को प्राथमिकता देता है, तो सोहागपुर को जिला बनाना समय की अनिवार्य मांग है।

इतिहास गवाह है: प्रशासनिक नींव यहीं से

प्रतिनिधिमंडल ने अपने ज्ञापन में उल्लेख किया कि जब वर्तमान नर्मदापुरम (पूर्व नाम होशंगाबाद) प्रशासनिक रूप से विकसित नहीं हुआ था, तब सोहागपुर में कोर्ट-कचहरी संचालित होती थी। न्यायिक और प्रशासनिक परंपरा की शुरुआत यहां पहले हुई।

यह केवल अतीत की स्मृति नहीं, बल्कि यह प्रमाण है कि सोहागपुर ऐतिहासिक रूप से प्रशासनिक केंद्र रहा है।

पौराणिक पहचान और सांस्कृतिक विरासत

ज्ञापन में यह भी रेखांकित किया गया कि पौराणिक मान्यताओं के अनुसार सोहागपुर द्वापर युग में बाणासुर की राजधानी ‘शोणितपुर’ के रूप में प्रसिद्ध रहा है। प्राचीन मंदिर, हनुमान नाका क्षेत्र में प्राप्त मूर्तियां और महाशिवरात्रि का विशाल मेला इसकी सांस्कृतिक गहराई को दर्शाते हैं।

नाम की व्युत्पत्ति ‘सुहागपुर-शोभाग्यपुर-शोणितपुर’ से जुड़ी परंपराएं इस क्षेत्र की ऐतिहासिक निरंतरता को मजबूत करती हैं।

सतपुड़ा की गोद में—टाइगर स्टेट का आधार

सोहागपुर के आसपास फैला सतपुड़ा अंचल प्रदेश की पहचान है। सतपुड़ा टाइगर रिजर्व और सतपुरा नेशनल पार्क का बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र में आता है।

मध्यप्रदेश को ‘टाइगर स्टेट’ कहा जाता है—और इस अंचल में बाघों की उल्लेखनीय मौजूदगी प्रदेश की वन संपदा और पर्यटन क्षमता का मजबूत आधार है। इको-टूरिज्म, जैव विविधता और प्राकृतिक संसाधनों के दृष्टिकोण से सोहागपुर राष्ट्रीय महत्व का क्षेत्र है।

1965 से सशक्त तहसील, आज भी अग्रणी

ज्ञापन में यह प्रमुखता से रखा गया कि 1965 में मध्यप्रदेश के गठन के समय से ही सोहागपुर एक विस्तृत और प्रभावी तहसील रहा है। तवा नदी से दूधी नदी तक फैला विशाल भू-भाग इसे जिले की सबसे बड़ी तहसील बनाता रहा है।

आज भी क्षेत्रफल और जनसंख्या के आधार पर यह अग्रणी है। चारों विधानसभाओं में सर्वाधिक मतदाता इसी क्षेत्र में हैं—जो प्रशासनिक सुदृढ़ीकरण की दृष्टि से जिला गठन की आवश्यकता को और मजबूत करता है।

कृषि, संरचना और विकास की पूर्ण क्षमता

गेहूं और दालों का भरपूर उत्पादन, नर्मदा के निकट रणनीतिक स्थिति, ग्रामीण-शहरी संतुलन, शैक्षणिक संस्थाएं और खेल गतिविधियों का विस्तार—ये सभी कारक जिला गठन के मानकों पर सोहागपुर को पूर्ण रूप से सक्षम बनाते हैं।

ज्ञापन में कहा गया कि बड़ा भौगोलिक क्षेत्र और अधिक जनसंख्या होने के कारण प्रशासनिक सेवाओं की त्वरित उपलब्धता के लिए जिला बनाना व्यावहारिक और आवश्यक कदम होगा।

“यह मांग किसी के विरोध में नहीं”

राकेश एक्का ने स्पष्ट किया—

“यह मांग किसी क्षेत्र के विरोध में नहीं, बल्कि संतुलित और समग्र विकास के पक्ष में है। जिस नगर ने न्याय व्यवस्था की नींव पहले देखी, जो पौराणिक राजधानी रहा, जहां वन संपदा और कृषि दोनों की ताकत है—वह आज भी तहसील तक सीमित क्यों रहे? अब समय है कि सोहागपुर को उसका प्रशासनिक सम्मान मिले।”

अब फैसला शासन के हाथ में

इतिहास, संसाधन, जनसंख्या, प्रशासनिक अनुभव और जनसमर्थन—इन सभी आधारों पर सोहागपुर की दावेदारी मजबूत होती जा रही है।

अब निगाहें राज्य शासन और प्रशासन के निर्णय पर टिकी हैं। यदि संतुलित विकास, सुशासन और त्वरित सेवा वितरण लक्ष्य है, तो सोहागपुर को जिला बनाना केवल मांग नहीं—बल्कि एक तार्किक और दूरदर्शी निर्णय होगा।

 

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