सेंट पेट्रिक स्कूल के सामने रोज़ मंडराती मौत, हादसे का इंतज़ार करता सिस्टम
सोहागपुर के सेंट पेट्रिक स्कूल के सामने फैली अव्यवस्था बच्चों की जान पर भारी पड़ सकती है। सड़क पर खड़ी गाड़ियाँ, ट्रैफिक जाम और प्रशासन की चुप्पी—क्या किसी बड़े हादसे का इंतज़ार हो रहा है?

संवाददाता राकेश पटेल इक्का
सोहागपुर।
क्या सोहागपुर प्रशासन किसी मासूम की लाश गिरने का इंतज़ार कर रहा है?
क्या सेंट पेट्रिक स्कूल प्रबंधन की “प्रतिष्ठा” बच्चों की जान से बड़ी हो गई है?
शहर में लगातार हो रहे सड़क हादसों के बावजूद सेंट पेट्रिक स्कूल के ठीक सामने फैली अराजकता आज भी जस की तस बनी हुई है। यह कोई छोटी लापरवाही नहीं, बल्कि सीधा-सीधा मौत को न्योता देने वाली स्थिति है।
बच्चों की जान सड़क पर, जिम्मेदार मौन
स्कूल की छुट्टी के समय नज़ारा भयावह होता है—
- दोपहिया-चारपहिया वाहन सड़क पर अवैध तरीके से खड़े
- सड़क पूरी तरह संकरी और जाम
- छोटे-छोटे बच्चे तेज रफ्तार वाहनों के बीच से जान जोखिम में डालकर सड़क पार करते हुए
यह सब रोज़ हो रहा है… खुलेआम… सबके सामने।
हादसा होगा तो जिम्मेदार कौन?
सबसे बड़ा और तीखा सवाल यही है—
अगर कल किसी बच्चे को वाहन कुचल दे, तो जिम्मेदारी कौन लेगा?
- स्कूल प्रबंधन, जो अनुशासन और संस्कार की दुहाई देता है, लेकिन अपने गेट के बाहर फैली अव्यवस्था पर आंख मूंदे बैठा है?
- प्रशासन, जो हर हादसे के बाद नियम-कानून की बातें करता है, लेकिन पहले से दिख रही खतरे की इस तस्वीर पर चुप्पी साधे हुए है?
“हादसा पहले, कार्रवाई बाद में” की नीति!
स्थानीय लोगों का साफ कहना है कि स्कूल समय पर यह इलाका जाम और डर का केंद्र बन जाता है। कई बार वाहन चालकों और बच्चों के बीच सिर्फ कुछ इंच का फासला रह जाता है।
यह सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि आग से खेलना है।
इसके बावजूद— न स्कूल ने वैकल्पिक पार्किंग बनाई
- न ट्रैफिक पुलिस की स्थायी ड्यूटी लगाई गई
- न प्रशासन ने सख्ती दिखाई
कब जागेगा सिस्टम?
सोहागपुर में शायद यही परंपरा बन चुकी है—
पहले हादसा, फिर जांच, फिर बयान, फिर भूल।
अब सवाल पूरे शहर का है—
👉 क्या किसी मासूम की जान जाने के बाद ही चेतना आएगी?
👉 या प्रशासन और स्कूल प्रबंधन समय रहते जिम्मेदारी निभाएंगे?
अगर अब भी आंखें बंद रहीं, तो याद रखिए—
यह सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि अपराध माना जाएगा।







