पिपरिया में बढ़ता नशे का खतरा: छात्र संगठन ने एसपी को सौंपा पत्र, विशेष अभियान की मांग तेज
गली-मोहल्लों तक फैले नशे के नेटवर्क पर कड़ी कार्रवाई की जरूरत—स्टूडेंट संगठन की चेतावनी

पिपरिया (पूजा मालवीय)। शहर में नशे का अवैध कारोबार बीते कुछ समय से जिस तेज़ी से फैल रहा है, उसने युवाओं, अभिभावकों और स्थानीय समाज में गंभीर चिंता पैदा कर दी है। इसी मुद्दे को लेकर शुक्रवार को स्टूडेंट संगठन पिपरिया ने नर्मदापुरम जिले के पुलिस अधीक्षक को पत्र सौंपकर तत्काल सख़्त कार्रवाई की मांग की।
संगठन ने स्पष्ट चेताया कि पिपरिया में नशे का जाल “खतरनाक स्तर” तक पहुँच चुका है और वर्तमान स्थिति समय रहते नियंत्रण न करने पर गंभीर सामाजिक संकट में बदल सकती है।
संगठन ने रखे चिंताजनक तथ्य
छात्र प्रतिनिधियों द्वारा दिए पत्र में शहर की स्थिति का जो चित्र प्रस्तुत किया गया है, वह बेहद गंभीर है—
- गली-मोहल्लों में नशे का सामान आसानी से उपलब्ध, कई जगह खुलेआम बिक्री।
- स्कूल और कॉलेज परिसरों के आसपास संदिग्ध गतिविधियाँ लगातार बढ़ रही हैं।
- कई युवा नशे की गिरफ्त में, जिससे शिक्षा और भविष्य दोनों प्रभावित हो रहे हैं।
- स्थानीय नागरिकों की शिकायतें और दी गई सूचनाएँ अक्सर कार्रवाई के बिना ही ठंडी पड़ जाती हैं।
छात्रों का कहना है कि नशे का कारोबार जिस तरह खुलेआम बढ़ रहा है, उससे लगता है मानो शहर में कानून का कोई भय ही न रह गया हो।
“कई बार शिकायतें कीं, फिर भी स्थिति जस की तस”—छात्र संगठन
संगठन के सदस्यों ने कहा कि उन्होंने कई बार पुलिस को सूचना दी, जगह-जगह शिकायतें दर्ज कराईं, लेकिन नतीजे उम्मीद के मुताबिक नहीं मिले।
उनके अनुसार, नशे के सौदागर लगातार सक्रिय हैं और युवाओं को निशाना बना रहे हैं, जिससे सामाजिक वातावरण दूषित होता जा रहा है।
एसपी से ये प्रमुख मांगें उठाईं
छात्र प्रतिनिधियों ने पुलिस अधीक्षक से शहर को नशामुक्त करने के लिए कठोर कदम उठाने की मांग की है—
- नशे के नेटवर्क पर व्यापक विशेष अभियान चलाया जाए।
- संदिग्ध स्थानों पर नियमित छापेमारी की जाए।
- स्कूल-कॉलेज क्षेत्रों में पुलिस गश्त सख़्त और लगातार रखी जाए।
- नशे का कारोबार करने वालों और वितरकों के खिलाफ कठोर दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
- स्थानीय नागरिकों द्वारा दी जाने वाली शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई हो।
संगठन का कहना है कि यदि अब भी कठोर कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले समय में यह समस्या “विकराल रूप” ले सकती है और भविष्य की युवा पीढ़ी को गंभीर नुकसान पहुँचा सकती है।
समाज में बढ़ती चिंता—जनभागीदारी भी जरूरी
स्थानीय लोगों का मत है कि केवल पुलिस कार्रवाई ही नहीं, बल्कि समाज—विशेषकर माता-पिता, स्कूल प्रबंधन और सामाजिक संगठनों—को भी नशामुक्ति के अभियान में शामिल होना चाहिए।
क्योंकि नशे से लड़ाई पुलिस के साथ-साथ सामूहिक जागरूकता और निगरानी से ही जीती जा सकती है।







