दक्षिणमुखी हनुमान मंदिर विवाद: कुटिल दबाव में हुए स्थान परिवर्तन के विरोध में राज्यपाल को सौंपा ज्ञापन
इटारसी में हनुमान मंदिर संघर्ष समिति ने 30 दिन में कार्रवाई नहीं होने पर जन आंदोलन की चेतावनी दी

संवाददाता सनी लालवानी
इटारसी (नर्मदापुरम) — नगर की ऐतिहासिक पहचान श्री दक्षिणमुखी हनुमान मंदिर संघर्ष समिति ने मंदिर के कथित स्थान परिवर्तन और प्रशासन द्वारा कानूनी प्रावधानों का पालन न करने के विरोध में महामहिम राज्यपाल महोदय मध्यप्रदेश शासन के नाम ज्ञापन एसडीएम को सौंपा।
संघर्ष समिति ने अपने ज्ञापन में कहा कि आज़ादी से पहले रेल्वे भूमि पर स्थित पीपल वृक्ष और दक्षिणमुखी हनुमान मंदिर को मध्यप्रदेश सार्वजनिक स्थान (धार्मिक भवन एवं गतिविधियों का विनियमन) अधिनियम 2001 और 2015 की धाराओं का पालन किए बिना कुटिल दबाव में लीज भूमि पर स्थानांतरित कर दिया गया। समिति ने इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।
समिति ने रखी ये प्रमुख मांगे
- मंदिर की लीज भूमि का भू-अधिकार पत्र श्री हनुमान जी महाराज के नाम से जारी किया जाए।
- पूज्य पीपल वृक्ष को उसी स्थान पर संरक्षित किया जाए, जो मंदिर से जुड़ा था।
- नव-निर्मित मंदिर की सेवा का दायित्व पूर्व समिति के पास रहे।
- मंदिर की गतिविधियों में राजनीतिक हस्तक्षेप न हो।
समिति के संरक्षक गोपाल सोनी और संयोजक राजकुमार मालवीय ने बताया कि जब एसडीएम कार्यालय से दस्तावेज मांगे गए, तो कोई रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं मिला। उनका कहना है कि “पूर्व अधिकारियों ने दबाव में आकर मंदिर स्थानांतरण की भूमिका निभाई, जो नगरवासियों ने स्वयं देखा है।”
उन्होंने कहा कि यदि 30 दिनों के भीतर जांच कर दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं की गई, तो संघर्ष समिति द्वारा जन आंदोलन किया जाएगा, जिसकी जिम्मेदारी जिला एवं स्थानीय प्रशासन की होगी।
इस अवसर पर सकल हिन्दू समाज के अनेक युवा उपस्थित रहे।
प्रताप सिंह वर्मा
प्रचार प्रमुख, दक्षिणमुखी हनुमान मंदिर संघर्ष समिति, इटारसी







