मध्य प्रदेश

शिव के दिव्य प्रकाश में दमकती संस्कृति: भोजपुर महोत्सव के दूसरे दिन लोक, शास्त्र और सुरों का अद्भुत संगम

संवाददाता सम्राट अंकित कुशवाहा

भोजपुर/मंडीदीप, 16 फरवरी 2026। मध्यप्रदेश शासन के संस्कृति विभाग द्वारा जिला प्रशासन रायसेन के सहयोग से ऐतिहासिक भोजपुर मंदिर परिसर में महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर आयोजित तीन दिवसीय “महादेव” भोजपुर महोत्सव का दूसरा दिन भक्ति, शास्त्रीय सौंदर्य और लोक रंगों से सराबोर रहा। श्रद्धालुओं, श्रोताओं और दर्शकों की बड़ी उपस्थिति ने आयोजन को और भी गरिमामय बना दिया। कलाकारों का स्वागत उप संचालक संस्कृति डॉ. पूजा शुक्ला एवं भोजपुर मंदिर के महंत श्री पवन गिरी महाराज ने पुष्पगुच्छ भेंट कर किया।

बघेली लोकगायन से बही शिवभक्ति की धारा

दूसरे दिवस की पहली प्रस्तुति बघेली लोकगायन की रही। सुश्री शीला त्रिपाठी एवं उनके साथियों (भोपाल) ने सुमधुर स्वर में बघेलखंड की परंपराओं में रचे-बसे भगवान शिव के गीत प्रस्तुत किए।
उन्होंने “गौरी गणेश मनाऊं…” से आरंभ करते हुए “तप करत उमा जी आज…”, “मोरे अंगना मा आये भोलेनाथ…”, “चली भोले की बरतिया हिमांचल नगरी…” और “गउरा का ब्याहन आये महादेव…” जैसे गीतों से महाशिवरात्रि की अलौकिकता को जीवंत कर दिया।
अंत में “भोला मांगय गवनवा होली मा…” के साथ प्रस्तुति को विराम दिया गया। श्रोतागण भक्ति और लोकधुनों में डूबे नजर आए।

कथक शैली में शिव की अद्वैत छटा

इसके बाद शिव केंद्रित नृत्यनाटिका की प्रभावशाली प्रस्तुति सुश्री आकृति जैन एवं उनके साथियों (भोपाल) ने दी। कथक शैली में रूपक ताल पर अर्धनारीश्वर की कथा को दर्शाते हुए उन्होंने शिव के अद्वैत स्वरूप को साकार किया।
“शिवोहम” की प्रस्तुति ने आत्मा और परमात्मा की एकत्व भावना को प्रकट किया। इसके उपरांत शिव-सती प्रसंग, दक्ष यज्ञ प्रसंग, शिव-पार्वती विवाह और शिव तांडव स्तोत्रम् के माध्यम से मंच पर शास्त्रीयता और अध्यात्म का अद्भुत समन्वय देखने को मिला।
सुश्री आकृति जैन के साथ आठ नृत्यांगनाओं ने सामूहिक रूप से मनोहारी प्रस्तुति दी, जिसे दर्शकों ने खूब सराहा।

महालक्ष्मी अय्यर की सुरमयी संध्या ने किया मंत्रमुग्ध

दूसरे दिवस की अंतिम प्रस्तुति सुप्रसिद्ध गायिका महालक्ष्मी अय्यर (मुंबई) की रही। उन्होंने अपनी मधुर, प्रभावपूर्ण और सुरमयी आवाज में शिव-स्तुति एवं लोकप्रिय गीतों की प्रस्तुति देकर समूचे परिसर को भक्तिमय बना दिया।
उन्होंने “शिव कैलाशों के वासी…” से शुरुआत कर वातावरण को शिवमय कर दिया। इसके बाद “नमो नमो शंकरा…”, “शिव तांडव स्तोत्रम्…” और “बम लहरी…” की प्रस्तुति ने श्रोताओं को भक्ति रस में सराबोर कर दिया।
शास्त्रीयता और आधुनिकता के सुंदर संगम ने महोत्सव को संगीतामृत से परिपूर्ण कर दिया। अंत में उन्होंने अपने लोकप्रिय गीतों से दर्शकों का दिल जीत लिया।

संस्कृति और श्रद्धा का संगम

“महादेव” भोजपुर महोत्सव का दूसरा दिन यह प्रमाणित करता है कि जब लोक परंपराएं, शास्त्रीय विधाएं और आधुनिक सुर एक साथ आते हैं, तो संस्कृति का दिव्य प्रकाश समाज को नई ऊर्जा देता है। महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर आयोजित यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि मध्यप्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का जीवंत उत्सव भी है।

 

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