गाडरवारा में देव उठनी ग्यारस पर छिड़ाव घाट की सदियों पुरानी मढ़ई में उमड़ा जनसैलाब
सजी खेल-खिलौनों, झूले-चकरी और चाट-पकौड़ी की दुकानें, ढाल टोली और मृदंग की धुन ने बांधा समां

गाडरवारा (नरसिंहपुर)।
देव उठनी ग्यारस के पावन अवसर पर गाडरवारा के छिड़ाव घाट नदी मोहल्ला क्षेत्र में सदियों पुरानी पारंपरिक मढ़ई मेला हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ।
कांगो माता पूजन के साथ मेले का शुभारंभ हुआ, जिसमें हजारों लोगों ने भाग लिया।
कांगो माता पूजन के साथ शुरू हुई मढ़ई

सुबह से ही श्रद्धालु छिड़ाव घाट पहुंचे और परंपरा अनुसार कांगो माता का पूजन-अर्चन किया। पूजा के बाद घाट क्षेत्र में मढ़ई मेले का औपचारिक शुभारंभ हुआ। इस दौरान परंपरागत वाद्य यंत्रों—मृदंग, ढोल, नगाड़ों—की गूंज से पूरा क्षेत्र भक्तिमय वातावरण में डूब गया।
सड़कों पर सजी रौनक — खेल-खिलौनों और झूलों की धूम
मेले में चौकी से लेकर घाट तक सड़क के दोनों किनारे दुकानों की लंबी कतारें सजी रहीं।
यहां बच्चों के लिए खेल-खिलौनों, झूला, फिसलन पट्टी, चकरी रेलगाड़ी जैसे मनोरंजन के साधन आकर्षण का केंद्र रहे।
महिलाओं के लिए चूड़ियां, श्रृंगार सामग्री, ऋतु फल और चाट-चौपटिया की दुकानों पर जबरदस्त भीड़ रही।

ग्वाल टोली और मोरपंख ढाल ने बढ़ाई मढ़ई की शान
पारंपरिक ढाल नृत्य करने वाली ग्वाल टोली, मोरपंख ढाल और गाजे-बाजे के साथ टोरमा बोल की धुनों ने लोगों का मन मोह लिया।
शाम तक लोग नाचते-गाते और पारंपरिक धुनों पर झूमते नजर आए।
हर वर्ग के लोगों ने लिया आनंद
शहर के सभी वर्गों—महिलाओं, युवाओं, बच्चों और बुजुर्गों—ने मढ़ई मेले में पहुंचकर परंपरा का आनंद लिया।
मेला सिर्फ धार्मिक आयोजन ही नहीं, बल्कि सामाजिक एकता और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक बन गया।







