विकास के दावे, ज़मीन पर मौत का सच,सोहागपुर की सड़कों पर पसरा खौफ, आधे दर्जन मासूमों की जान के बाद भी प्रशासन बेख़बर

संवाददाता राकेश पटेल इक्का
सोहागपुर (नर्मदापुरम)।
सोहागपुर क्षेत्र में लगातार हो रहे सड़क हादसे अब केवल दुर्घटनाएं नहीं रहे, बल्कि व्यवस्था की असफलता का खूनी प्रमाण बन चुके हैं। बीते दो दिनों में आधे दर्जन से अधिक मासूमों की मौत ने यह साफ कर दिया है कि विकास के दावे कागजों में दमक रहे हैं, जबकि ज़मीन पर सड़कों पर सिर्फ खतरा ही खतरा है।
ये मौतें किसी आंकड़े का हिस्सा नहीं, बल्कि उन घरों की कहानी हैं जहां अब मासूम बच्चों की आवाज़ हमेशा के लिए खामोश हो चुकी है। सवाल यह है कि क्या इन मौतों के बाद भी शासन-प्रशासन और परिवहन विभाग नींद से नहीं जागेगा?
रात की सड़कों पर मौत का पहरा, प्रशासन की आंखों पर पट्टी
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि रात होते ही सोहागपुर की सड़कें ट्रैक्टर-ट्रॉलियों, डंपरों और भारी वाहनों का खुला मैदान बन जाती हैं।
- न रेडियम,
- न पीछे लाइट,
- न कोई निगरानी
अंधेरे में ये वाहन दिखाई ही नहीं देते और सामने से आ रहे बाइक सवार, स्कूली बच्चे और राहगीर सीधे मौत से टकरा जाते हैं। परिवहन विभाग को ये वाहन दिन में नहीं दिखते या जानबूझकर अनदेखी की जाती है?
हादसे रोज, कार्रवाई कभी नहीं
शिकायतें वर्षों से की जा रही हैं, लेकिन ठोस और स्थायी कार्रवाई आज तक नहीं हुई।
हेलमेट, सीट बेल्ट, नंबर प्लेट, पंजीकरण, रात्रिकालीन सुरक्षा—
ये सारे नियम फाइलों में बंद कैदियों की तरह पड़े हैं।
हादसे के बाद वही रस्म अदायगी—
- पुलिस मौके पर
- बयान
- पोस्टमॉर्टम
- और फिर अगली मौत का इंतज़ार
फोर-लेन के दावे, टूटी पुलिया और बिना रेलिंग के पुल
राजनीतिक मंचों से फोर-लेन सड़क जैसे बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन ज़मीनी हकीकत यह है कि
- कई पुल-पुलियाओं की रेलिंग टूटी हुई है,
- नालों और नदियों के किनारे कोई सुरक्षा इंतज़ाम नहीं,
- कई वाहन पहले ही पानी में गिर चुके हैं।
यह विकास नहीं, बल्कि लापरवाही का स्मारक है।
पत्रकार राकेश एक्का की आरटीओ/परिवहन विभाग से भावुक अपील
(जो प्रशासन के लिए आईना है)
अब भी वक्त है—
1️⃣ रात में चलने वाले हर वाहन में लाइट और रेडियम अनिवार्य करें
2️⃣ रात 7 से सुबह 5 बजे तक सख्त निगरानी रखें
3️⃣ हेलमेट और सीट बेल्ट का नियम बिना भेदभाव लागू करें
4️⃣ बिना नंबर और कागज वाला वाहन तुरंत जब्त करें
5️⃣ स्कूल, कोचिंग समय में भारी वाहनों पर रोक लगाएं
6️⃣ ब्लैक स्पॉट पर तुरंत रेलिंग, स्पीड ब्रेकर और लाइट लगाएं
7️⃣ चालकों की अनिवार्य ट्रेनिंग कराएं
8️⃣ पुलिस-आरटीओ की संयुक्त चेकिंग रोज हो
9️⃣ हादसे के बाद नहीं, पहले जागरूकता अभियान चलाएं
🔟 जांच नहीं, रोकथाम को प्राथमिकता दें
हर मौत के बाद जांच नहीं, पहले ज़िंदगी बचाइए
साहब/मैडम जी,
अगर इन बिंदुओं पर सख्ती दिखाई गई, तो
✔ आधे से ज्यादा रात के हादसे रुक सकते हैं
✔ बच्चों और बुजुर्गों की जान बच सकती है
✔ और उजड़ते घरों में फिर से मुस्कान लौट सकती है
यह कोई राजनीतिक मुद्दा नहीं—
- यह जनहित का सवाल है
- यह ज़िंदगी और मौत का सवाल है
आज सोहागपुर की सड़कें चेतावनी दे रही हैं।
अगर अब भी नहीं जागे,
तो अगली खबर फिर किसी मासूम की मौत की होगी—
और उस खबर की जिम्मेदारी सिर्फ सिस्टम की होगी।







