खेतों के भ्रमण से बच्चों ने जाना अन्नदाता का संघर्ष, मन में जगा सम्मान और कृतज्ञता
पीएम श्री शासकीय माध्यमिक शाला खैरुआ के विद्यार्थियों ने खेतों का भ्रमण कर किसानों के संघर्ष, कृषि के महत्व और अन्नदाता की भूमिका को करीब से जाना।

संवाददाता अवधेश चौकसे
सालीचौका (नरसिंहपुर)।
शिक्षा को पुस्तकों की सीमाओं से बाहर निकालकर जीवन से जोड़ने के उद्देश्य से पीएम श्री शासकीय माध्यमिक शाला खैरुआ के विद्यार्थियों को हाल ही में एक प्रेरणादायी शैक्षणिक भ्रमण के अंतर्गत खेतों का भ्रमण कराया गया। इस अनूठे प्रयास ने बच्चों को न केवल कृषि के महत्व से परिचित कराया, बल्कि अन्नदाता किसान के संघर्ष, मेहनत और त्याग को भी प्रत्यक्ष रूप से समझने का अवसर दिया।
भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों को रबी फसल में बोई जाने वाली प्रमुख फसलों जैसे गेहूँ, चना, सरसों सहित अन्य फसलों की जानकारी दी गई। बच्चों ने खेतों में फसलों की बुआई से लेकर उनकी देखभाल और वृद्धि की प्रक्रिया को नजदीक से देखा। किसानों ने उन्हें बताया कि एक दाने को खेत से थाली तक पहुँचाने में कितनी मेहनत, धैर्य और समय लगता है।
किसानों ने विद्यार्थियों को समझाया कि वे कड़ी धूप, ठंड, बारिश और विपरीत परिस्थितियों में भी निरंतर परिश्रम करते हैं, तब जाकर हमारे घरों तक अन्न पहुँचता है। थाली में रखी रोटी के पीछे छिपी किसान की मेहनत और संघर्ष की कहानी सुनकर कई विद्यार्थी भावुक हो उठे और उनके मन में किसानों के प्रति सम्मान की भावना और गहरी हो गई।
इस अवसर पर विद्यार्थियों को यह भी बताया गया कि किसान केवल अन्नदाता ही नहीं, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। कृषि के बिना न तो आत्मनिर्भर भारत की कल्पना संभव है और न ही राष्ट्र की समृद्धि। किसानों के परिश्रम से ही देश का विकास और समाज का पोषण संभव हो पाता है।
यह शैक्षणिक भ्रमण विद्यार्थियों के लिए केवल एक जानकारीपूर्ण यात्रा नहीं रहा, बल्कि उनके व्यक्तित्व विकास में भी सहायक सिद्ध हुआ। भ्रमण के बाद बच्चों के चेहरों पर नया उत्साह, जिज्ञासा और सीखने की ललक स्पष्ट दिखाई दी। विद्यार्थियों ने महसूस किया कि जब पुस्तकों में पढ़ा गया ज्ञान जीवन से जुड़ता है, तब उसकी सार्थकता और भी बढ़ जाती है।
विद्यालय परिवार द्वारा आयोजित यह पहल बच्चों को प्रकृति, परिश्रम और अन्नदाता किसान के महत्व को समझाने की दिशा में एक सराहनीय और प्रेरणादायी कदम साबित हुई।







