चीचली नगर परिषद अध्यक्ष शेख मंजूर पद से हटाए गए, 12.19 लाख की वसूली के आदेश
नरसिंहपुर जिले की चीचली नगर परिषद के अध्यक्ष शेख मंजूर को निकाय में अनियमितताओं के आरोप में पद से हटाया गया। मध्य प्रदेश शासन ने 12.19 लाख रुपये की वसूली के भी आदेश दिए और जबलपुर हाईकोर्ट में कैविएट दायर की।

गाडरवारा / नरसिंहपुर। मध्य प्रदेश शासन के नगरीय विकास एवं आवास विभाग, मध्य प्रदेश ने चीचली नगर परिषद के अध्यक्ष शेख मंजूर को पद से हटाने का आदेश जारी कर दिया है। शासन द्वारा जारी आदेश में निकाय में हुई अनियमितताओं को गंभीर मानते हुए उन्हें तत्काल प्रभाव से अध्यक्ष पद से पृथक किया गया है। साथ ही निकाय को हुई आर्थिक हानि की राशि की वसूली के भी निर्देश दिए गए हैं।
अनियमितताओं की शिकायत के बाद हुई कार्रवाई
मामले की शुरुआत भाजपा पार्षद संदीप पैगवार द्वारा की गई शिकायत से हुई थी। शिकायत में नगर परिषद में दैनिक पारिश्रमिक पर कर्मचारियों को बिना सक्षम स्वीकृति के साप्ताहिक मस्टर पर रखे जाने संबंधी अनियमितताओं का आरोप लगाया गया था।
इस शिकायत के आधार पर कलेक्टर कार्यालय नरसिंहपुर द्वारा प्रारंभिक जांच कराई गई। जांच में पाया गया कि नगर परिषद चीचली में नियमों का पालन किए बिना कर्मचारियों को रखा गया, जिससे निकाय को आर्थिक नुकसान हुआ। जांच में तत्कालीन अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ अध्यक्ष शेख मंजूर को भी प्रथम दृष्टया जिम्मेदार माना गया।
कारण बताओ नोटिस और सुनवाई की प्रक्रिया
मामले में शासन ने 24 दिसंबर 2025 को मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम 1961 की धारा 41-क के तहत शेख मंजूर को कारण बताओ नोटिस जारी किया था और 15 दिनों के भीतर जवाब मांगा गया था।
इसके बाद 13 जनवरी 2026 को शेख मंजूर ने जवाब देते हुए आरोपों से संबंधित दस्तावेज उपलब्ध न होने की बात कही और अतिरिक्त समय की मांग की। इसके बाद विभाग ने 20 जनवरी 2026 को मुख्य नगरपालिका अधिकारी को दस्तावेज उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
दस्तावेज उपलब्ध कराए जाने के बाद 3 फरवरी 2026 को सुनवाई तय की गई, जिसमें शेख मंजूर स्वयं उपस्थित हुए और अपना पक्ष रखा। सुनवाई के बाद प्रकरण को आदेश के लिए सुरक्षित रखा गया था।
12.19 लाख रुपये की वसूली के आदेश
शासन ने मामले में निर्णय लेते हुए 26 फरवरी 2026 को आदेश जारी किया। आदेश के अनुसार शेख मंजूर, जो 10 अगस्त 2022 से नगर परिषद चीचली के निर्वाचित अध्यक्ष थे, उन्हें पद से हटाया गया है।
इसके साथ ही निकाय को हुई आर्थिक हानि 12,19,168 रुपये की वसूली का आदेश भी दिया गया है। यह राशि उन अधिकारियों और कर्मचारियों से भी समान रूप से वसूल की जाएगी जिन्हें इस मामले में जिम्मेदार पाया गया है। वसूली की पूरी राशि नगर परिषद की निधि में जमा कराई जाएगी।
हाईकोर्ट में कैविएट दायर
इस मामले में शासन ने मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय जबलपुर में कैविएट भी दायर की है। इसका उद्देश्य यह है कि यदि शेख मंजूर इस आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर करते हैं, तो अदालत शासन का पक्ष सुने बिना कोई एकपक्षीय स्थगन आदेश जारी न करे।







