सोहागपुर के चाचा मंगल सिंह रघुवंशी : न्याय, सेवा और सरलता के सच्चे प्रतीक
71 वर्ष की उम्र में भी समाज सेवा और जनहित के कार्यों में सक्रिय

संवाददाता राकेश पटेल इक्का
सोहागपुर। न्याय और समाज सेवा के क्षेत्र में अपना जीवन समर्पित करने वाले मंगल सिंह रघुवंशी आज भी लोगों के बीच “चाचा” के नाम से जाने जाते हैं। उनका जीवन संघर्ष, सेवा और सादगी की मिसाल है।
बचपन से हँसमुख और चुलबुले
5 नवम्बर 1954 को सोहागपुर के रघुवंशीपुरा में जन्मे मंगल सिंह रघुवंशी का बचपन बेहद रंगीन रहा। मिट्टी में खेलना, गली-मोहल्लों की शरारतें और पढ़ाई से प्रेम — यही उनके जीवन की पहली सीख बनी।
वकालत से समाज सेवा तक का सफर
पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने वकालत को अपना करियर चुना और नगर पालिका के विधिक सलाहकार, जिला विधिक अधिकारी तथा अभिभाषक संघ के अध्यक्ष बने। गरीब और कमजोर वर्ग के लिए उनकी मुस्कान और सहजता हमेशा भरोसे का प्रतीक रही।
समर्पण और ईमानदारी का प्रतीक
मंगल सिंह रघुवंशी का मानना है —
“काम करो नाम के लिए नहीं, दिल से करो।”
वे नोटरी का कार्य भी उतनी ही निष्ठा और समर्पण से करते हैं जैसे कोई मंदिर में पूजा कर रहा हो।
समाज में भाईचारे के प्रतीक
किसी भी सामाजिक आंदोलन या जनता के संघर्ष में वे हमेशा आगे रहे हैं। अमरकंटक रेल लाइन आंदोलन हो या जनहित के मुद्दे — चाचा मंगल सिंह हमेशा जनता की आवाज बने रहे।
राजनीति में सच्चे सिपाही
जिला कांग्रेस समिति में मुख्य महामंत्री और उपाध्यक्ष के रूप में रहते हुए उन्होंने कई युवाओं को दिशा दिखाई। उनका सरल संदेश हमेशा यही रहता –
“बेटा, सीधा और नेक रास्ता यही है।”
71 की उम्र में भी वही जोश
आज भी वे समाज सेवा, धार्मिक आयोजनों और जनहित के कार्यक्रमों में सक्रिय रहते हैं। दशहरा मधुर महोत्सव और डोल ग्यारस समिति में उनका योगदान सराहनीय रहा है।
सोहागपुर के लिए अमूल्य धरोहर
मंगल सिंह रघुवंशी का जीवन न्याय, सेवा और मुस्कान का प्रतीक है। उनका योगदान आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत रहेगा।







