बराखड़ कला में भूमि अभिलेखों में फर्जी बदलाव का मामला उठा, किसानों ने जनसुनवाई में लगाई न्याय की गुहार

संवाददाता राकेश पटेल इक्का
सिवनी मालवा (नर्मदापुरम)।
ग्राम बराखड़ कला के किसानों ने भूमि अभिलेखों में हुए कथित फर्जी परिवर्तनों को लेकर प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। सोमवार को जनसुनवाई के दौरान शहबाज आलम, दानिश आलम और अन्य भूमि स्वामियों ने पटवारी महेन्द्र मेहरा, तहसीलदार और एसडीएम सिवनी मालवा पर मिलीभगत कर भूमि रिकॉर्ड में फर्जी खसरा तैयार करने और नामांतरण में अनियमितता के गंभीर आरोप लगाए।
किसानों का कहना है कि पटवारी ने मध्यप्रदेश भू-राजस्व संहिता, 1959 की धारा 106, 109 और 110 का उल्लंघन करते हुए, बिना सक्षम अधिकारी की अनुमति के नया खसरा नंबर 440 तैयार कर लिया। इतना ही नहीं, खसरा नंबर 240 को भी अवैध रूप से 240/1 और 240/2 में विभाजित कर दिया गया, जिससे भूमि स्वामियों को आर्थिक और मानसिक दोनों तरह से नुकसान झेलना पड़ रहा है।
शिकायतकर्ताओं की मांग
शिकायतकर्ताओं — शहबाज आलम, दानिश आलम, हजारीलाल गुर्जर, विनोद रघुवंशी, मुक्ता दुबे, लोकेन्द्र राठौर, रामसेवक रघुवंशी और आयुष रघुवंशी — ने जनसुनवाई अधिकारी को ज्ञापन सौंपकर निम्न मांगें की हैं:
- पटवारी महेन्द्र मेहरा के खिलाफ IPC की धाराएं 420, 466, 468, 471 और 409 के तहत आपराधिक प्रकरण दर्ज कर सख्त कार्रवाई की जाए।
- फर्जी तैयार किए गए खसरा नंबर 440, 240/1 और 240/2 को निरस्त कर भूमि अभिलेखों को मूल स्थिति में बहाल किया जाए।
- संबंधित तहसीलदार और अनुविभागीय अधिकारी की भूमिका की जांच कर, दोषी पाए जाने पर विभागीय कार्यवाही की जाए।
“एक साल से न्याय की राह देख रहे हैं”
शिकायतकर्ताओं ने बताया कि वे पिछले एक वर्ष से लगातार तहसीलदार, एसडीएम, कलेक्टर और कमिश्नर कार्यालय तक शिकायत कर चुके हैं, लेकिन अब तक न तो जांच शुरू हुई, न कोई कार्रवाई हुई।
भूमि स्वामी फिलहाल अपनी जमीन पर न तो विक्रय कर पा रहे हैं, न निर्माण कार्य कर पा रहे हैं।
कार्रवाई की मांग तेज
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई, तो वे कलेक्टर कार्यालय के समक्ष धरना-प्रदर्शन करेंगे।
स्थानीय लोगों का कहना है कि इस प्रकार के फर्जी रिकॉर्ड बदलाव पर प्रशासन की चुप्पी राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न खड़ा करती है।









