अंतर्जातीय विवाह योजना में रिश्वतखोरी: लोकायुक्त ने कलेक्ट्रेट के बाबू को 10 हजार लेते रंगे हाथों पकड़ा
नर्मदापुरम कलेक्ट्रेट में अंतर्जातीय विवाह योजना के तहत रिश्वत मांग रहा बाबू लोकायुक्त के जाल में फंसा, 10 हजार लेते रंगे हाथों गिरफ्तार।

नर्मदापुरम।
मध्यप्रदेश में भ्रष्टाचार के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। ताजा मामला नर्मदापुरम जिले से सामने आया है, जहां अंतर्जातीय विवाह प्रोत्साहन योजना के तहत मिलने वाली राशि के बदले रिश्वत मांगने वाले जनजातीय कार्य विभाग के बाबू को लोकायुक्त ने रंगे हाथों गिरफ्तार किया है।
भोपाल लोकायुक्त की टीम ने कलेक्ट्रेट कार्यालय में पदस्थ बाबू मनोज सोनी को 10 हजार रुपए की रिश्वत लेते हुए पकड़ा। आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधन 2018) की धारा 7 के तहत कार्रवाई की जा रही है।
अंतर्जातीय विवाह पर मिलने वाली राशि के बदले मांगी रिश्वत
शिकायतकर्ता प्रवीण सोलंकी, निवासी ग्राम सिपुर सिवनी, सिवनी मालवा (नर्मदापुरम) ने अंतर्जातीय विवाह किया था। शासन की योजना के अंतर्गत उन्हें 2 लाख रुपए की प्रोत्साहन राशि मिलनी थी। इस भुगतान के लिए उन्होंने कलेक्ट्रेट में पदस्थ बाबू मनोज सोनी से संपर्क किया।
आरोप है कि बाबू ने बैकडेट में फाइल तैयार कर भुगतान कराने के नाम पर पहले 2 हजार रुपए और काम पूरा होने के बाद 7 हजार रुपए की रिश्वत की मांग की।
लोकायुक्त ने बिछाया जाल, कलेक्ट्रेट में की कार्रवाई
रिश्वत से परेशान होकर आवेदक ने लोकायुक्त पुलिस अधीक्षक भोपाल दुर्गेश राठौर से शिकायत की। शिकायत की सत्यता पाए जाने पर ट्रैप टीम गठित की गई।
योजना के अनुसार जैसे ही आरोपी बाबू ने 10 हजार रुपए की रिश्वत ली, लोकायुक्त टीम ने उसे रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया।
भ्रष्टाचार पर सख्त कार्रवाई
लोकायुक्त अधिकारियों के अनुसार आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत विधिवत कार्रवाई की जा रही है। इस कार्रवाई से सरकारी योजनाओं में रिश्वतखोरी पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं।







