मध्य प्रदेश

नरसिंहपुर में गन्ना कटाई-ढुलाई में बड़ा खेल: किसानों से अधिक वसूली, मजदूरों व वाहन चालकों का शोषण

बीच के ठेकेदारों ने बना रखा है शोषण का तंत्र, मिल प्रबंधन की भूमिका पर उठे सवाल

संवाददाता अवधेश चौकसे

सालीचौका (नरसिंहपुर)।
नरसिंहपुर जिले के सालीचौका सहित गन्ना उत्पादक क्षेत्रों में गन्ना कटाई और ढुलाई व्यवस्था को लेकर गंभीर अनियमितताएं सामने आ रही हैं। आरोप है कि गन्ना कटाई करने वाले मजदूरों और ढुलाई करने वाले वाहन चालकों से तय दर से अधिक कटौती की जा रही है, जबकि किसानों से भी मजदूरी और ढुलाई के नाम पर अतिरिक्त वसूली की जा रही है।

इस पूरी व्यवस्था में बीच के स्वघोषित ठेकेदार और बिचौलिए सबसे अधिक लाभ कमा रहे हैं, जबकि असली मेहनत करने वाले मजदूर, परिवहनकर्ता और किसान तीनों ही आर्थिक शोषण का शिकार हो रहे हैं।

सरकारी दरें अलग, जमीनी हकीकत अलग

गन्ना कटाई और ढुलाई की दरें सरकार और शुगर मिल प्रबंधन द्वारा तय की जाती हैं, जो क्षेत्र और दूरी के अनुसार होती हैं।

2025-26 सीजन की अनुमानित दरें

  • गन्ना कटाई दर: ₹25 से ₹30 प्रति क्विंटल
  • गन्ना ढुलाई दर: दूरी के अनुसार ₹15 प्रति क्विंटल या उससे थोड़ा अधिक

लेकिन जमीनी स्तर पर इन दरों के बावजूद किसानों से अधिक राशि ली जा रही है, और मजदूरों तथा वाहन चालकों को पूरा भुगतान नहीं दिया जा रहा

जब भुगतान मिल से होता है, तो ठेकेदार क्यों?

सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब—

  • शुगर मिल प्रबंधन द्वारा कटाई-ढुलाई के लिए राशि जारी की जाती है,
  • मजदूरों के लिए बैलबंडी और आवश्यक संसाधनों की व्यवस्था मिल से ही होती है,

तो फिर मजदूरों और वाहन चालकों को सीधे भुगतान क्यों नहीं किया जाता?

आरोप है कि मिल से निकली राशि पहले ठेकेदारों के पास जाती है, जहां से उसका एक बड़ा हिस्सा बीच में ही हड़प लिया जाता है

मजदूरों की मजबूरी, संपर्क नहीं मिल प्रबंधन से

गन्ना कटाई करने वाले मजदूरों का कहना है—

“हमारा मिल प्रबंधन से कोई सीधा संपर्क नहीं होता। ठेकेदार ही काम दिलाता है और वही भुगतान करता है। मजबूरी में जो मिलता है, उसी में काम करना पड़ता है।”

वहीं ढुलाई करने वाले वाहन चालकों का कहना है—

“हमारी बैलबंडी की डायरी और हिसाब-किताब ठेकेदार ही रखता है। हमें यह तक पता नहीं होता कि मिल से कितनी राशि आई और कितनी काट ली गई।”

किसानों से भी हो रही दोहरी वसूली

किसानों का आरोप है कि ठेकेदार—

  • मजदूरों के नाम पर उनसे अतिरिक्त पैसा लेते हैं,
  • फिर उन्हीं मजदूरों और ढुलाई करने वालों से भी क्विंटल के हिसाब से वसूली करते हैं।

इस तरह ठेकेदार दोनों पक्षों से पैसा लेकर अपना लाभ सुनिश्चित करते हैं।

वर्षों से चल रही शोषण की परंपरा

स्थानीय लोगों का कहना है कि यह कोई नई समस्या नहीं है, बल्कि कई वर्षों से चली आ रही शोषण की परंपरा बन चुकी है।
न तो इस पर अब तक ठोस कार्रवाई हुई और न ही कोई पारदर्शी भुगतान व्यवस्था लागू की गई।

श्रम विभाग और जिला प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग

किसानों और मजदूर संगठनों ने मांग की है कि—

  • गन्ना कटाई और ढुलाई का भुगतान सीधे मजदूरों व वाहन चालकों के खातों में किया जाए
  • ऑनलाइन या रजिस्टर आधारित पारदर्शी सिस्टम लागू हो
  • बीच के बिचौलियों और ठेकेदारों की भूमिका समाप्त की जाए
  • पूरे मामले की जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की जाए

लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इस व्यवस्था पर रोक नहीं लगी, तो शोषण और अधिक गहराता जाएगा।

निष्कर्ष

गन्ना कटाई और ढुलाई में बनी यह व्यवस्था न सिर्फ मजदूरों का शोषण कर रही है, बल्कि किसानों पर भी अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाल रही है।
अब देखना यह होगा कि श्रम विभाग, जिला प्रशासन और शुगर मिल प्रबंधन इस गंभीर मुद्दे पर कब तक ठोस कदम उठाते हैं।

 

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