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भेड़ाघाट हादसा: सेल्फी लेते वक्त महिला नर्मदा में गिरी, मौत; पति और 10 साल की बेटी के सामने उजड़ा परिवार

जबलपुर। मध्यप्रदेश के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल न्यू भेड़ाघाट में एक दर्दनाक हादसे ने खुशियों भरे पल को मातम में बदल दिया। शादी की सालगिरह मनाने पहुंचा परिवार उस समय स्तब्ध रह गया, जब सेल्फी लेते वक्त महिला फिसलकर नर्मदा नदी में गिर गई। यह भयावह दृश्य महिला के पति और 10 वर्षीय बेटी की आंखों के सामने हुआ।

सेल्फी लेते समय हुआ हादसा

मृतका की पहचान विजय नगर निवासी स्वाति गर्ग (36 वर्ष) के रूप में हुई है। जानकारी के अनुसार शनिवार को स्वाति की शादी की सालगिरह थी। इस खास मौके को यादगार बनाने के लिए वह अपने पति आशीष गर्ग, 10 साल की बेटी और सास के साथ न्यू भेड़ाघाट घूमने पहुंची थीं।

शाम के समय नर्मदा नदी के किनारे मोबाइल से सेल्फी लेते दौरान अचानक उनका पैर फिसल गया और वह सीधे गहरे पानी में जा गिरीं। तेज बहाव के कारण वह कुछ ही पलों में आंखों से ओझल हो गईं।

पति और बेटी के सामने बह गई महिला

घटना होते ही पति आशीष और बेटी ने शोर मचाया। मौके पर मौजूद गोताखोरों और स्थानीय लोगों ने तुरंत बचाव की कोशिश की, लेकिन नर्मदा के तेज बहाव के कारण महिला को बचाया नहीं जा सका। कुछ ही देर में वहां मौजूद पर्यटकों में अफरा-तफरी मच गई।

ओएफके फैक्ट्री में पदस्थ हैं पति

परिजनों के अनुसार रामेश्वरम कॉलोनी, विजय नगर निवासी आशीष गर्ग ओएफके (ऑर्डनेंस फैक्ट्री खमरिया) में जूनियर वर्क मैनेजर के पद पर कार्यरत हैं। शनिवार दोपहर ड्यूटी से लौटने के बाद परिवार पहले त्रिपुरी माता मंदिर दर्शन करने गया और फिर भेड़ाघाट पहुंचा।

घंटों चला सर्च ऑपरेशन

शनिवार शाम तक जब महिला का कोई सुराग नहीं मिला तो पति ने तिलवारा थाना पहुंचकर गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस और गोताखोरों ने देर रात तक तलाश की, लेकिन अंधेरा और तेज बहाव राहत कार्य में बाधा बना।

स्वर्गद्वारी क्षेत्र में मिला शव

रविवार सुबह फिर से सर्च ऑपरेशन शुरू किया गया। शाम को घटनास्थल से करीब 2 किलोमीटर दूर स्वर्गद्वारी क्षेत्र में स्वाति गर्ग का शव बरामद हुआ। पुलिस ने शव को पोस्टमॉर्टम के बाद परिजनों को सौंप दिया।

पर्यटन स्थलों की सुरक्षा पर फिर सवाल

इस हादसे ने एक बार फिर भेड़ाघाट जैसे पर्यटन स्थलों पर सुरक्षा इंतजाम और चेतावनी संकेतों की कमी को उजागर कर दिया है। खतरनाक स्थानों पर न तो पर्याप्त बैरिकेडिंग है और न ही सख्त निगरानी, जिससे ऐसे हादसे बार-बार सामने आ रहे हैं।

खुशियों का दिन बन गया जिंदगी का सबसे बड़ा दर्द

जिस दिन को परिवार खुशियों के साथ मनाने निकला था, वही दिन उनके जीवन का सबसे दर्दनाक अध्याय बन गया। पति और मासूम बेटी के सामने मां का यूं चले जाना हर किसी को झकझोर देने वाला है।

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