मध्यप्रदेश की भैरवा कला को मिला GI टैग, बैतूल की लोक विरासत को मिली नई पहचान

संवाददाता शैलेंद्र गुप्ता
बैतूल। मध्यप्रदेश: मध्यप्रदेश के सांस्कृतिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय जुड़ गया है। बैतूल जिले के पारंपरिक भैरवा कला को भारत सरकार के बौद्धिक संपदा अधिकार रजिस्ट्री (GI रजिस्ट्री) द्वारा भौगोलिक संकेतक (GI) टैग प्रदान किया गया है। इस विशेष सम्मान से न केवल इस लोककला की राष्ट्रीय पहचान स्थापित हुई है, बल्कि इससे इसकी अस्मिता और संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।
बैतूल जिले के प्रसिद्ध कारीगर रंगलाल भैरवा के पुत्र बालदेव भैरवा के अथक प्रयासों और स्थानीय समुदाय, शोधकर्ताओं व संस्थाओं के सहयोग से भैरवा कला का GI टैग हासिल हुआ। बैतूल के ग्राम टिगरिया के कारीगरों द्वारा सृजित इस कला के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व को प्रस्तुत करने के लिए प्राचीन दस्तावेजों, परंपरागत विधियों और ऐतिहासिक साक्ष्यों का संग्रह किया गया, जिससे GI आवेदन मजबूत हुआ।
सनराइज रूरल डेवलपमेंट सोसाइटी के सचिव राजकुमार सिरोरिया ने बताया कि संस्था द्वारा नाबार्ड के सहयोग से इस कला के लिए GI टैग हेतु आवेदन प्रस्तुत किया गया था। इसके बाद GI रजिस्ट्रार चेन्नई द्वारा आयोजित पैनल डिस्कशन और साक्षात्कार प्रक्रिया में भैरवा कला को GI टैग प्रदान किया गया।
मध्यप्रदेश के इस अनमोल सांस्कृतिक धरोहर को GI टैग मिलने से बैतूल के कारीगरों को आर्थिक सशक्तिकरण के नए अवसर मिलेंगे। इसके साथ ही, भैरवा कला की पहचान राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी स्थापित होगी।
भारत के बौद्धिक संपदा अधिकारों के विशेषज्ञ पद्मश्री डॉ. रजनी कांत ने इस अवसर पर कहा, “यह हमारे लिए अत्यंत गर्व का पल है कि मध्यप्रदेश की प्राचीन शिल्प कला को GI टैग के जरिए भारत की बौद्धिक संपदा अधिकार सूची में स्थान मिला है।”
GI टैग मिलने के बाद बैतूल की भैरवा कला को लेकर कारीगरों में खुशी की लहर दौड़ गई है, साथ ही इस क्षेत्र के विभागों में नई चेतना का संचार हुआ है।
यह GI टैग बैतूल की इस अनमोल लोक कला को संरक्षण, सम्मान और बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।







