ओशो की क्रीड़ा नगरी गाडरवारा में विदेशी ओशो संन्यासियों का आगमन
ध्यान, सत्संग और गुरु स्मृतियों में डूबे विदेशी साधक

गाडरवारा। विश्व प्रसिद्ध दार्शनिक एवं आध्यात्मिक गुरु आचार्य रजनीश ‘ओशो’ की क्रीड़ा नगरी गाडरवारा स्थित ओशो लीला आश्रम में विगत दिनों दो दिवसीय विदेशी ओशो संन्यासियों का आगमन हुआ। स्वामी आनंदी आनंद के नेतृत्व में पहुंचे इन विदेशी संन्यासियों ने ओशो लीला आश्रम में रहकर गुरु ओशो की विभिन्न ध्यान विधियों का अनुभव किया।
विदेशी संन्यासियों ने सक्रिय ध्यान, नादब्रह्म, कुंडलिनी ध्यान, साथ ही व्हाइट रोब ब्रदरहुड सत्संग, नृत्य, भजन-कीर्तन में भाग लेकर आध्यात्मिक आनंद का रसपान किया। पूरे आश्रम परिसर में ध्यान और उत्सव का वातावरण बना रहा।
ओशो की शिक्षा स्थली का किया दर्शन
इस अवसर पर विदेशी संन्यासियों ने गंज प्राथमिक शाला का भी भ्रमण किया, जहां ओशो ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त की थी। इसके पश्चात उन्होंने शासकीय आदर्श उच्चतर माध्यमिक विद्यालय का भी दौरा किया, जहां ओशो ने माध्यमिक एवं हायर सेकेंडरी स्तर की शिक्षा ली थी।
विद्यालय के जिस कक्ष में ओशो ने अध्ययन किया था, उसे शाला प्रबंधन द्वारा आज भी संरक्षित एवं सुसज्जित रखा गया है। विदेशी संन्यासियों ने उस कक्षा में बैठकर अपने गुरु ओशो की उपस्थिति का गहन अनुभव किया।
सार्वजनिक पुस्तकालय में ओशो साहित्य का अवलोकन
विदेशी ओशो संन्यासियों ने नगर के सार्वजनिक पुस्तकालय पहुंचकर ओशो द्वारा अध्ययन की गई तथा उनके द्वारा प्रदत्त पुस्तकों का अवलोकन किया। यहां संरक्षित ओशो की सैकड़ों पुस्तकें एवं 251 स्व-हस्ताक्षरित किताबें देखकर सभी संन्यासी भावविभोर हो गए। कई संन्यासी ओशो द्वारा हस्ताक्षरित पुस्तकों को निहारते हुए अहोभाव से भर उठे।
कई देशों से आए संन्यासी
इस दल में हॉलैंड, नीदरलैंड, स्पेन, जोहान्सबर्ग सहित विभिन्न देशों के विदेशी ओशो संन्यासी शामिल रहे। सभी ने ओशो से जुड़े स्थलों का दर्शन कर नगर भ्रमण भी किया।
गाडरवारा से गहरा जुड़ाव
ओशो लीला आश्रम के मीडिया प्रभारी स्वामी राजेश नीरस ने बताया कि स्वामी आनंदी आनंद का गाडरवारा से गहरा नाता है। उनका जन्म गाडरवारा में ही हुआ है और वे इस नगर के ऐसे सपूत हैं, जो आज देश-विदेश में ओशो संन्यासियों के लिए ध्यान शिविरों का संचालन कर रहे हैं।
उन्होंने बताया कि ओशो की क्रीड़ा नगरी गाडरवारा एवं ओशो लीला आश्रम में वर्षभर देश-विदेश से संन्यासियों का आवागमन बना रहता है, जिससे नगर की आध्यात्मिक पहचान वैश्विक स्तर पर स्थापित हो रही है।







