मध्य प्रदेश

गणतंत्र दिवस के जश्न के बीच सालीचौका में उठा किसान आक्रोश, ट्रैक्टर मार्च ने सरकार से पूछे सवाल, नरसिंहपुर में लहराता तिरंगा, तो सालीचौका में ट्रैक्टरों की गूंज

गणतंत्र दिवस पर सालीचौका में संयुक्त मोर्चा के नेतृत्व में ट्रैक्टर मार्च निकाला गया। खाद संकट, शुगर मिल भुगतान और किसान विरोधी नीतियों के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन हुआ।

संवाददाता अवधेश चौकसे

सालीचौका (नरसिंहपुर)।
जब पूरा नरसिंहपुर जिला 77वें गणतंत्र दिवस की खुशियों में डूबा हुआ था और हर ओर तिरंगा लहरा रहा था, उसी समय सालीचौका में एक अलग ही तस्वीर सामने आई। यहां संयुक्त मोर्चा के बैनर तले किसानों ने ट्रैक्टर मार्च निकालकर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया और सरकार की नीतियों पर सवाल खड़े किए।

यह विरोध भले ही मुख्यधारा मीडिया की सुर्खियों में ज्यादा न आया हो, लेकिन मौजूदा राजनीतिक और सामाजिक परिप्रेक्ष्य में इसके मायने बेहद गहरे माने जा रहे हैं।

कौन कर रहा था विरोध?

यह ट्रैक्टर मार्च माकपा, कांग्रेस और किसान सभा के संयुक्त नेतृत्व में आयोजित किया गया।
प्रदर्शन में प्रमुख रूप से—

  • माकपा जिला सचिव कामरेड जगदीश पटेल
  • कांग्रेस मंडल अध्यक्ष पवन शुक्ला
  • किसान सभा तहसील महासचिव देवेंद्र वर्मा
  • लीलाधर लोधी, करण
  • माकपा राज्य सचिव मंडल सदस्य एवं किसान सभा के राष्ट्रीय संयुक्त सचिव बादल सरोज
  • कांग्रेस नेता सूरज राय

मुख्य रूप से मौजूद रहे।

विरोध की असली वजह क्या है?

माकपा और किसान नेताओं का आरोप है कि केंद्र की मोदी सरकार और मध्यप्रदेश की मोहन सरकार किसान व मजदूर विरोधी नीतियां चला रही हैं और किसानों से किए गए वायदों से लगातार मुकर रही हैं।

सालीचौका किसान आंदोलन

खाद संकट बना सबसे बड़ा मुद्दा

दिसंबर 2025 और जनवरी 2026 के दौरान खाद की भीषण किल्लत किसानों के लिए सबसे गंभीर समस्या बनकर उभरी है।

  • हजारों किसान केंद्रों और सोसायटियों पर घंटों लाइन में खड़े रहे
  • प्रतिदिन केवल लगभग 100 किसानों को ही खाद मिलने का आरोप
  • अधिकांश किसान खाली हाथ लौटने को मजबूर

नेताओं ने कहा—
“खेत तैयार हैं, फसल सामने है, लेकिन खाद के बिना किसान लाचार है।”

शुगर मिल भुगतान और कम दरों का दर्द

आंदोलन में शुगर मिलों द्वारा लंबित भुगतान (Payment Arrears) और अन्य मिलों की तुलना में कम दरों पर गन्ना खरीदी जैसे मुद्दे भी प्रमुख रहे।

नेताओं ने याद दिलाया कि वर्ष 2028 के ‘कृषि उद्योग समागम’ में, जहां उपराष्ट्रपति और मुख्यमंत्री तक मौजूद थे, किसानों ने अपनी समस्याएं सीधे सरकार के सामने रखी थीं—
लेकिन आज तक कोई ठोस समाधान सामने नहीं आया।

क्यों खास है यह आंदोलन?

किसानों से जुड़े मुद्दों पर माकपा और किसान नेताओं की मुखरता नई नहीं है,
लेकिन गणतंत्र दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्व पर ट्रैक्टर मार्च निकालकर उठी यह आवाज एक बड़ा सवाल खड़ा करती है—

क्या लोकतंत्र सिर्फ उत्सव मनाने का नाम है?
या फिर जनता की पीड़ा सुनना भी उसकी बुनियादी जिम्मेदारी है?

सालीचौका का यह ट्रैक्टर मार्च इसी सवाल के साथ सत्ता के गलियारों तक गूंज भेजता नजर आया।

 

WhatsApp Group Join Now
Telegram Group Join Now

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!