क्राइममध्य प्रदेश

आदतन अपराधी पर प्रशासन का सख्त प्रहार, छह माह के लिए जिला बदर

झाबुआ कलेक्टर नेहा मीना ने 26 आपराधिक मामलों में लिप्त आदतन अपराधी को छह माह के लिए जिला बदर किया। MP State Security Act के तहत सख्त कार्रवाई।

झाबुआ। जिले में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी श्रीमती नेहा मीना ने एक बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई करते हुए आदतन अपराधी को छह माह के लिए जिला बदर करने के आदेश जारी किए हैं। यह कार्रवाई मध्यप्रदेश राज्य सुरक्षा अधिनियम, 1990 की धारा 5 के तहत की गई है।

जिला दण्डाधिकारी द्वारा जारी आदेश के अनुसार रामसिंह उर्फ रमजु उर्फ राजु उर्फ रमजिया, पिता जुवानसिंह मेडा, निवासी ग्राम आमलीफलिया थाना कोतवाली झाबुआ (वर्तमान पता वागनेरा थाना कालीदेवी, जिला झाबुआ) को आदेश प्राप्त होने के 24 घंटे के भीतर झाबुआ जिले सहित समीपवर्ती जिलों धार, रतलाम, आलीराजपुर एवं बड़वानी की राजस्व सीमाओं से बाहर जाना होगा। यह प्रतिबंध आगामी छह माह तक प्रभावशील रहेगा।

आदेश में स्पष्ट किया गया है कि इस अवधि के दौरान अनावेदक बिना सक्षम न्यायालय की पूर्व लिखित अनुमति के प्रतिबंधित क्षेत्रों में प्रवेश नहीं कर सकेगा।

26 आपराधिक प्रकरण, अस्पताल में फायरिंग तक की वारदात

पुलिस अधीक्षक झाबुआ द्वारा प्रस्तुत प्रतिवेदन के अनुसार अनावेदक वर्ष 2009 से लगातार आपराधिक गतिविधियों में संलिप्त रहा है। उसके विरुद्ध झाबुआ एवं कालीदेवी थाना क्षेत्रों में हत्या, हत्या का प्रयास, लूट, डकैती की तैयारी, नकबजनी, छेड़छाड़, आगजनी, मारपीट, बलवा एवं वाहन दुर्घटना जैसे गंभीर अपराधों के कुल 26 प्रकरण दर्ज हैं।

चिंताजनक तथ्य यह भी है कि इनमें से 4 नए अपराध केवल एक वर्ष के भीतर दर्ज हुए हैं। हाल ही में अनावेदक द्वारा जिला अस्पताल परिसर झाबुआ में रात्रि के समय बंदूक से फायरिंग कर गंभीर आपराधिक घटना को अंजाम दिया गया, जिससे क्षेत्र में दहशत का माहौल बन गया।

क्षेत्र में भय का वातावरण, गवाही देने से डरते हैं लोग

पुलिस प्रतिवेदन में उल्लेख किया गया है कि अनावेदक एवं उसके परिजनों की दबंग प्रवृत्ति और आपराधिक इतिहास के चलते क्षेत्र में आम नागरिक भयभीत हैं। स्थिति यह है कि लोग थाने में रिपोर्ट दर्ज कराने और न्यायालय में गवाही देने से कतराते हैं, जिससे लोक शांति और सार्वजनिक व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हो रही है।

पूर्व में अनावेदक के विरुद्ध प्रतिबंधात्मक कार्रवाई और गुण्डा फाइल भी खोली गई थी, लेकिन इसके बावजूद उसकी आपराधिक गतिविधियों में कोई सुधार नहीं आया।

लोक शांति के लिए जरूरी थी कठोर कार्रवाई

जिला प्रशासन ने सभी तथ्यों, पुलिस प्रतिवेदन और कानून-व्यवस्था पर पड़ रहे प्रभाव को देखते हुए यह निष्कर्ष निकाला कि यदि समय रहते कठोर कदम नहीं उठाया गया, तो भविष्य में गंभीर घटनाओं की पुनरावृत्ति की प्रबल संभावना बनी रहेगी।

इसी आधार पर मध्यप्रदेश राज्य सुरक्षा अधिनियम, 1990 की धारा 5 (क, ख) के अंतर्गत छह माह के लिए जिला बदर की कार्रवाई की गई है।

 

 

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