सोहागपुर में गैस बम पर बैठा प्रशासन, अवैध सिलेंडर भंडारण और कालाबाज़ारी ने शहर को बना दिया मौत का इंतज़ार करता इलाका

संवाददाता राकेश पटेल इक्का
सोहागपुर।
सोहागपुर नगर आज किसी शांत कस्बे की तरह नहीं, बल्कि एक ऐसे बारूद के ढेर की तरह खड़ा है, जिस पर प्रशासन आंखें मूंदे बैठा है। घरेलू गैस सिलेंडरों का अवैध भंडारण, खुलेआम कालाबाज़ारी और नियमों की धज्जियां उड़ाती अनधिकृत बिक्री अब यहां सामान्य बात बन चुकी है। सवाल यह नहीं कि खतरा है या नहीं—सवाल यह है कि बड़ा हादसा कब होगा?
नगर के रिहायशी इलाकों में आम मकानों को बिना किसी अनुमति, सुरक्षा मानक या अग्नि व्यवस्था के गैस गोदामों में तब्दील कर दिया गया है। जिन घरों में बच्चे, बुज़ुर्ग और महिलाएं रहते हैं, उन्हीं दीवारों के पीछे दर्जनों सिलेंडर ठूंसकर रखे गए हैं। यह कोई छिपी हुई सच्चाई नहीं है—स्थानीय लोग बार-बार चेतावनी दे चुके हैं, लेकिन प्रशासन की प्रतिक्रिया हर बार वही रही—खामोशी, टालमटोल और लापरवाही।
प्रशासन की निष्क्रियता सबसे बड़ा खतरा
घरेलू गैस सिलेंडर कोई साधारण वस्तु नहीं, बल्कि चलता-फिरता विस्फोटक है। इसके बावजूद न तो नियमित निरीक्षण हो रहा है, न आकस्मिक छापेमारी, और न ही दोषियों पर कोई सख़्त कार्रवाई। ऐसा प्रतीत होता है मानो संबंधित विभाग किसी बड़े हादसे का इंतज़ार कर रहे हों, ताकि बाद में औपचारिक जांच बैठाई जा सके और जिम्मेदारी एक-दूसरे पर डाली जा सके।
देश के अलग-अलग हिस्सों में गैस सिलेंडर विस्फोट से पूरे परिवार जलकर खत्म हो चुके हैं, लेकिन सोहागपुर का प्रशासन उन घटनाओं से भी कोई सबक लेने को तैयार नहीं दिखता।
कालाबाज़ारी फल-फूल रही, सिस्टम फेल
स्थिति और भी शर्मनाक तब हो जाती है जब अधिकृत गैस एजेंसियों से उपभोक्ताओं को समय पर सिलेंडर नहीं मिलते, लेकिन वही सिलेंडर अवैध नेटवर्क के ज़रिये नकद भुगतान पर महंगे दामों में आसानी से उपलब्ध हैं। यह साफ़ संकेत है कि आपूर्ति तंत्र में या तो भारी भ्रष्टाचार है या फिर जानबूझकर की जा रही अनदेखी।
घरेलू गैस का व्यावसायिक उपयोग खुलेआम हो रहा है—ढाबों, दुकानों और अस्थायी प्रतिष्ठानों में—और संबंधित विभाग मूकदर्शक बने हुए हैं।
जिम्मेदार कौन है?
सबसे गंभीर प्रश्न यह है कि—
- स्टॉक की जांच कौन करेगा?
- अवैध भंडारण पर कार्रवाई किसकी जिम्मेदारी है?
- यदि हादसा हुआ तो जवाबदेह कौन होगा—तहसील प्रशासन, खाद्य विभाग, आपूर्ति विभाग या अग्निशमन?
अब तक किसी एक अधिकारी की जवाबदेही तय नहीं की गई, जिससे यह संदेश साफ़ जाता है कि सोहागपुर में जनसुरक्षा से ज्यादा महत्व फाइलों और औपचारिकताओं का है।
चेतावनी है, सनसनी नहीं
यह रिपोर्ट डर फैलाने के लिए नहीं, बल्कि आख़िरी चेतावनी के तौर पर है। अगर आज भी अवैध गैस भंडारण और कालाबाज़ारी पर कठोर कार्रवाई नहीं हुई, तो कल किसी विस्फोट, आग या जनहानि की स्थिति में प्रशासन नैतिक ही नहीं, बल्कि कानूनी रूप से भी खुद को बचा नहीं पाएगा।
सोहागपुर की जनता अब सवाल पूछ रही है—
क्या प्रशासन किसी मासूम की जान जाने के बाद ही जागेगा?







