अपर कलेक्टर गजेंद्र नागेश अचानक पहुंचे बालाजी लक्ष्मी नारायण मंदिर, गंदगी देख आहत
स्वयं झाड़ू-पोंछा लगाकर की सफाई, बदले भगवान के वस्त्र, 2 घंटे 12 मिनट चला स्वच्छता व श्रद्धा अभियान, ब्रह्मांड घाट के इतिहास में पहली बार किसी वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी ने स्वयं संभाली मंदिर की जिम्मेदारी

नरसिंहपुर। मां नर्मदा के पावन अंचल में स्थित भगवान ब्रह्मा की तपोभूमि ब्रह्मांड घाट एक बार फिर चर्चा का केंद्र बन गई, जब अपर कलेक्टर एवं जिला पंचायत सीईओ, आईएएस गजेंद्र नागेश देर शाम अचानक बालाजी लक्ष्मी नारायण मंदिर पहुंचे। मंदिर परिसर में व्याप्त भीषण गंदगी, बंद ताले और उपेक्षा देखकर वे अत्यंत व्यथित हो गए। बिना किसी औपचारिकता के उन्होंने स्वयं श्रमदान कर मंदिर की संपूर्ण सफाई करवाई और श्रद्धा के साथ भगवान की आरती की।
गंदगी और अव्यवस्था देख आहत हुए अपर कलेक्टर
मां नर्मदा तीर्थ क्षेत्र ब्रह्मांड घाट में मेला एवं स्वच्छता तैयारियों की समीक्षा के दौरान अपर कलेक्टर श्री नागेश लगभग शाम 5:48 बजे हाथीद्वार के समीप स्थित बालाजी लक्ष्मी नारायण मंदिर पहुंचे। उन्हें जानकारी मिली थी कि यहां जागृत एवं कलात्मक मूर्तियां स्थापित हैं, लेकिन मंदिर बंद मिला और आसपास गंदगी का अंबार देखकर वे अंदर झांकने पहुंचे।
मंदिर के भीतर
- धार्मिक पुस्तकों पर धूल की मोटी परत
- चमगादड़ों का डेरा और मल-मूत्र
- मूर्तियों के वस्त्र गंदे व अस्त-व्यस्त
- फर्श और दीवारों पर वर्षों की गंदगी
देखकर उनका मन अत्यंत दुखी हो गया।
बिना रुके स्वयं शुरू किया सफाई अभियान
स्थिति देखकर अपर कलेक्टर गजेंद्र नागेश ने तत्काल निर्णय लेते हुए
- झाड़ू लगवाई
- फर्श, दीवारें और मूर्तियां धोईं
- कचरा स्वयं हाथ से इकट्ठा कर बाहर फेंका
- धार्मिक पुस्तकों और पूजन सामग्री को सुरक्षित बाहर रखा
उन्होंने समाजसेवी अविनाश भाऊ के घर से पानी की व्यवस्था करवाई और गणेश, लक्ष्मी नारायण, सूर्य देव, हनुमान जी सहित सभी प्रतिमाओं को स्वयं धोकर साफ किया।
निजी खर्च से बनवाए भगवान के नए वस्त्र
सफाई के बाद अपर कलेक्टर ने
- तत्काल टेलर मास्टर को बुलवाया
- अपनी निजी खर्च से भगवान के लिए नई पोशाक सिलवाने का आदेश दिया
- मूर्तियों को स्वच्छ वस्त्र पहनाकर विधिवत पूजा-अर्चना करवाई
लगभग 2 घंटे 12 मिनट तक चले इस अभियान के बाद मंदिर में आरती, स्तुति और प्रसाद वितरण किया गया।
कड़ाके की ठंड में श्रद्धा देखकर उमड़ी भीड़
कड़ाके की ठंड में एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी को स्वयं सफाई करते देखकर आसपास के श्रद्धालु भी एकत्र हो गए। लोग आपस में चर्चा करने लगे कि जब प्रशासनिक अधिकारी इतनी निष्ठा से मंदिर सेवा कर सकता है, तो आमजन की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है।
पुरातत्व विभाग से जुड़ा मंदिर, होगी जांच
निरीक्षण के दौरान जानकारी सामने आई कि यह मंदिर पुरातत्व विभाग के अंतर्गत आता है।
- मंदिर की जमीन की स्थिति स्पष्ट नहीं
- वर्षों से सही ढंग से पुताई नहीं हुई
- मरम्मत व रखरखाव में लापरवाही
इन सभी बिंदुओं पर अपर कलेक्टर ने उच्चस्तरीय जांच के संकेत दिए।
सख्त संदेश: मंदिरों में लापरवाही बर्दाश्त नहीं
अपर कलेक्टर गजेंद्र नागेश ने स्पष्ट शब्दों में कहा—
“किसी भी मंदिर में गंदगी और लापरवाही स्वीकार्य नहीं है। हम कभी भी, कहीं भी निरीक्षण कर सकते हैं। सभी प्रबंधक अपनी जिम्मेदारी का ईमानदारी से निर्वहन करें।”
उन्होंने याद दिलाया कि कुछ दिन पूर्व ही बरमान और ब्रह्मांड घाट के सभी मंदिर प्रबंधकों की बैठक लेकर स्वच्छता, श्रद्धालुओं की सुविधा और व्यवस्थाओं को लेकर निर्देश दिए गए थे, फिर भी लापरवाही चिंता का विषय है।
ब्रह्मांड घाट के बदलते स्वरूप की उम्मीद
पिछले लगभग पौने दो महीनों से अपर कलेक्टर गजेंद्र नागेश जिस सक्रियता से
- धार्मिक स्थलों की स्वच्छता
- यात्रियों की सुविधा
- मेले की बेहतर व्यवस्था
- मंदिरों के संरक्षण
में रुचि ले रहे हैं, उससे यह उम्मीद जगी है कि ब्रह्मांड घाट और बरमान क्षेत्र आने वाले समय में एक आदर्श, स्वच्छ और विकसित धार्मिक पर्यटन स्थल के रूप में स्थापित होगा।







