आचार्य प्रवर संत शिरोमणि तारण तरण जयन्ती हर्षोल्लास के साथ मनाई गई

गाडरवारा। श्री दिगम्बर जैन समाज द्वारा आचार्य प्रवर संत शिरोमणि तारण तरण मण्डलाचार्य महाराज की जयंती श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ मनाई गई। जयंती के अवसर पर पूरे दिन विभिन्न धार्मिक एवं सामाजिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया।
पूर्व रात्रि में सांस्कृतिक कार्यक्रम
तारण जयंती की पूर्व संध्या पर तारण तरण मंदिर में सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें समाज के बच्चों और महिलाओं ने भक्ति गीत, नृत्य और सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ दीं।
सुबह मंदिर विधि एवं ग्रंथ पाठ
जयंती के दिन सुबह श्री तारण तरण दिगम्बर जैन चैत्यालय में पूर्ण भक्ति भाव से मंदिर विधि का आयोजन किया गया।
पुरुष और महिला वर्ग द्वारा आचार्य प्रवर तारण तरण महाराज द्वारा रचित चौदह ग्रंथों में से —
- श्री मालरोहण ग्रंथ,
- श्री पंडित पूजा ग्रंथ,
- श्री कमल बत्तीसी ग्रंथ
का सामूहिक पाठ किया गया।
आकर्षक झूला झुलाने की परंपरा
आचार्य प्रवर के जन्मोत्सव को परम हर्ष के साथ मनाने हेतु चैत्यालय में सुंदर व आकर्षक झूला सजाया गया। इसमें आचार्य प्रवर द्वारा रचित आध्यात्म वाणी ग्रंथ को विराजित किया गया। उपस्थित श्रद्धालुओं ने बारी-बारी से झूले को झुलाकर पुण्य लाभ प्राप्त किया।
रोगियों को भोजन वितरण
तत्पश्चात समाजजन सरकारी अस्पताल पहुंचे, जहाँ रोगियों को भोजन वितरण कर मानव सेवा का संदेश दिया गया।
दोपहर में भव्य शोभायात्रा
दोपहर में श्री तारण तरण जयंती के अवसर पर चांदी से निर्मित विशेष पालकी जी को सजाया गया। पालकी में आचार्य प्रवर द्वारा रचित आध्यात्म वाणी ग्रंथ को विराजित कर भव्य शोभायात्रा निकाली गई।
शोभायात्रा इन प्रमुख मार्गों से होते हुए निकली—
झंडा चौक → बड़ा सराफा → पुरानी गल्लामंडी → सब्जी बाजार → शिवालय चौक → शक्ति चौक → महावीर भवन → चावड़ी → पुराना सेंट्रल बैंक।
श्री तारण तरण दिगम्बर जैन चैत्यालय पहुँचकर पालकी में विराजित आध्यात्म वाणी ग्रंथ की आरती की गई और इसके बाद ग्रंथ को पुनः वेदी पर आस्तापित किया गया।
भक्ति, श्रद्धा और आनंद से ओतप्रोत इस आयोजन में बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित रहे।







