गाडरवारा में पहली बार आयोजित हो रही संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा में उमड़ा श्रद्धा का सागर
श्री वसुश्रेष्ठ दास (इस्कॉन उज्जैन) के मधुर वचनों ने भक्तों को किया भाव-विभोर, सप्तम दिवस पर कई दिव्य लीलाओं का वर्णन

गाडरवारा। शांतिनगर कॉलोनी में इस वर्ष पहली बार अत्यंत भव्य और आध्यात्मिक वातावरण में श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन किया जा रहा है। यह भागवत कथा इस्कॉन उज्जैन के संन्यासी एवं इस्कॉन बदनावर के अध्यक्ष श्री वसुश्रेष्ठ दास जी महाराज द्वारा 21 नवंबर से 27 नवंबर तक प्रतिदिन संगीतमय रूप में सुनाई जा रही है। आयोजन स्थल श्री ठाकुर सुरेंद्र सिंह जी के निवास पर बना हुआ है, जहाँ प्रतिदिन सैकड़ों श्रद्धालु पहुँचे और कथा श्रवण कर आध्यात्मिक लाभ ले रहे हैं।
कथा स्थल को आकर्षक फूलों की माला, रंग-बिरंगी लाइटों और शास्त्रीय झांकियों से सजाया गया है। हर दिन कथा से पहले भजन-कीर्तन और हरिनाम संकीर्तन से पूरा परिसर भक्तिरस में डूब जाता है।
सप्तम दिवस की विशेषताएँ: दिव्य लीलाओं का अद्भुत वर्णन
कथा के सातवें दिन (सप्तम दिवस) भगवान श्रीकृष्ण की कई प्रमुख और हृदयस्पर्शी लीलाओं का विस्तृत वर्णन किया गया।
महारास लीला
गुरुजी ने बताया कि महारास लीला भक्ति का सर्वोच्च स्वरूप है, जहाँ भगवान स्वयं भक्तों के प्रेम के अनुसार उनके साथ रास रचाते हैं। यह लीला आत्मा और परमात्मा के मिलन का प्रतीक है।
कंस वध
धर्म की रक्षा और अधर्म के विनाश के लिए भगवान द्वारा कंस का वध किया गया। गुरुजी ने समझाया कि यह प्रसंग हमें सिखाता है कि अहंकार और अत्याचार का अंत निश्चित है।
रुक्मणि विवाह
रुक्मणि जी द्वारा लिखे पत्र और श्रीकृष्ण का रथ ले जाकर उनका हरण विवाहासुर से करना—यह प्रसंग भक्त और भगवान के अटूट प्रेम की मिसाल है।
सुदामा मिलन
गरीब ब्राह्मण सुदामा और भगवान श्रीकृष्ण की परम मित्रता का मार्मिक वर्णन करते हुए गुरुजी ने कहा कि भगवान अपने भक्तों के प्रेम के भूखे होते हैं, न कि वस्तुओं के।
श्रीकृष्ण गोलोक गमन
कथा में भगवान के धामगमन का भावपूर्ण वर्णन किया गया, जिसे सुन श्रद्धालुओं की आँखें नम हो गईं।
परीक्षित मोक्ष
गुरुजी ने बताया कि श्रीमद् भागवत कथा का श्रवण स्वयं परीक्षित को मोक्ष दिलाने वाला सिद्ध हुआ। यह प्रसंग भागवत श्रवण की महिमा को प्रतिपादित करता है।
मार्कण्डेय चरित्र
मार्कण्डेय ऋषि की कथा और भगवान की कृपा से उनकी आयु वृद्धि का प्रसंग भी विस्तार से सुनाया गया।
श्रीमद् भागवत महात्म्य
वसुश्रेष्ठ दास जी ने संदेश दिया कि –
“भागवत कथा केवल पौराणिक कथा नहीं, बल्कि जीवन सुधारने का दिव्य ग्रंथ है।”
भक्तों के लिए महा प्रसादी का आयोजन
कथा के समापन पर श्रद्धालुओं के लिए महा प्रसादी का वितरण किया गया। दर्जनों परिवारों ने भंडारे की सेवा में सक्रिय योगदान दिया।
इस अवसर पर गुरुजी ने विशेष संदेश दिया—
“अन्न को भगवान का प्रसाद मानें, और इसे कभी व्यर्थ न जाने दें।”
उन्होंने सभी को भोजन का सम्मान करने तथा जितना आवश्यक हो उतना ही लेने की प्रेरणा दी।
स्थानीय परिवारों का विशेष योगदान
शांतिनगर कॉलोनी के सभी परिवारों ने आयोजन की तैयारी, व्यवस्था, प्रसादी एवं कथा सेवा में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। इससे पूरे क्षेत्र में भक्ति और सद्भाव का माहौल बना हुआ है।







