माँ नर्मदा उत्तर वाहिनी परिक्रमा में उमड़ा श्रद्धालुओं का जनसैलाब, गाडरवारा में गूंजे “नमामि देवी नर्मदे” के जयकारे
गाडरवारा में माँ नर्मदा उत्तर वाहिनी परिक्रमा में हजारों श्रद्धालुओं की भागीदारी। महामंडलेश्वर श्री सुरेन्द्र दास जी महाराज के सानिध्य में भव्य महाआरती, भजन-कीर्तन और प्रसादी का आयोजन।

गाडरवारा। “नमामि देवी नर्मदे, मां नर्मदे हर” के जयकारों से गूंजते नर्मदा तट पर इन दिनों भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है।
ग्राम काटजूनगर, ग्राम पंचायत पलोहा स्थित जलाराम आश्रम से प्रारंभ हुई मां नर्मदा उत्तर वाहिनी परिक्रमा में प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु शामिल होकर आस्था की डोर में बंधे नजर आ रहे हैं।
माघी पूर्णिमा से हुआ शुभारंभ
परिक्रमा का शुभारंभ 1 फरवरी 2026, माघी पूर्णिमा के पावन अवसर पर काटजूनगर नर्मदा घाट से हुआ।
यह यात्रा नयाखेड़ा, टिमरावन, हीरापुर, भटेरा होते हुए पुनः काटजूनगर घाट पर 3 मार्च 2026 (पूर्णिमा) को संपन्न होगी। लगभग 16 किलोमीटर की इस आध्यात्मिक यात्रा में श्रद्धालुओं का उत्साह चरम पर है।
महामंडलेश्वर के सानिध्य में चल रही परिक्रमा
यह पावन परिक्रमा महामंडलेश्वर श्री सुरेंद्र दास जी महाराज (इंडियावाड़ा, जिला नर्मदा, गुजरात) की प्रेरणा एवं आशीर्वाद से आयोजित की जा रही है।
उनके साथ अनेक संत-महात्मा एवं सूरज कुंड वाली माताजी भी परिक्रमा में शामिल होकर श्रद्धालुओं का मार्गदर्शन कर रहे हैं।
महामंडलेश्वर जी का कहना है कि माँ नर्मदा की आराधना से आध्यात्मिक शांति एवं मोक्ष की प्राप्ति होती है। उत्तर वाहिनी परिक्रमा का विशेष महत्व है और माँ नर्मदा का स्मरण मात्र से मन को शांति मिलती है।
भक्ति, भजन और महाआरती का दिव्य वातावरण
परिक्रमा के दौरान श्रद्धालु हाथों में धर्म ध्वज लेकर भजन-कीर्तन करते हुए आगे बढ़ रहे हैं।
नर्मदा के विभिन्न घाटों पर विशेष पूजा-अर्चना की जा रही है।
- प्रतिदिन दोपहर 2 बजे भटेरा घाट पर संगीत के साथ माँ नर्मदा की महाआरती
- भटेरा के पंचकुटी आश्रम में सरपंच राजू लोधी एवं सहयोगियों द्वारा बाल भोग व भोजन प्रसादी
- जलाराम आश्रम काटजूनगर में प्रतिदिन शाम को भोजन प्रसादी की व्यवस्था
- काटजूनगर घाट पर संतों के सानिध्य में भव्य महाआरती
पूरे क्षेत्र में भक्तिभाव और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संचार हो रहा है।
आस्था की अनूठी मिसाल
लगभग 16 किलोमीटर की इस यात्रा में श्रद्धालुओं की आस्था देखते ही बनती है।
महिलाएं, पुरुष, युवा और बुजुर्ग सभी माँ नर्मदा की आराधना में लीन होकर उत्तर वाहिनी परिक्रमा कर रहे हैं।
आयोजन समिति ने धर्मप्रेमी जनता से अधिक से अधिक संख्या में परिक्रमा में शामिल होकर पुण्य लाभ अर्जित करने की अपील की है।







