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चेतावनी दरकिनार, लहंगा नदी में समाई कार—एक युवक की मौत, तीन की हालत नाज़ुक

रेलिंग न लगने की लापरवाही ने छीनी जान, प्रशासन की अनदेखी फिर बनी मौत की वजह

संवाददाता राकेश पटेल इक्का

सोहागपुर।
“अगर समय रहते रेलिंग लग जाती, तो आज एक घर उजड़ने से बच जाता…”
यह पंक्तियाँ आज लहंगा नदी के किनारे खड़े हर व्यक्ति की जुबान पर थीं, जहां भोपाल से सोहागपुर की ओर आ रही एक कार अचानक असंतुलित होकर सीधे नदी में जा गिरी

इस दिल दहला देने वाले सड़क हादसे में कार सवार चार युवकों में से एक की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि तीन युवक गंभीर रूप से घायल होकर जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहे हैं।

पहले से था खतरे का संकेत, फिर भी नहीं जागा प्रशासन

जिस स्थान पर यह हादसा हुआ, वहां रेलिंग लगाए जाने की मांग लंबे समय से की जा रही थी। स्थानीय लोगों, राहगीरों और वाहन चालकों ने कई बार प्रशासन को चेताया था कि पुल और सड़क किनारे सुरक्षा रेलिंग न होने से कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।
लेकिन जिम्मेदार विभागों ने हर बार इस चेतावनी को नजरअंदाज कर दिया—और आखिरकार वही हुआ, जिसकी आशंका थी।

लहंगा नदी दुर्घटना

राहगीरों ने दिखाया साहस, पुलिस ने किया रेस्क्यू

हादसे के तुरंत बाद मौके पर मौजूद राहगीरों ने इंसानियत की मिसाल पेश करते हुए नदी में गिरी कार से घायलों को बाहर निकालने की कोशिश की। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और काफी मशक्कत के बाद कार में फंसे युवकों को बाहर निकाला गया।

घायलों को तत्काल सोहागपुर शासकीय अस्पताल पहुंचाया गया, जहां तीनों की हालत गंभीर बनी हुई है। मृतक युवक के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है।

यह हादसा नहीं, सिस्टम की विफलता है

यह घटना महज एक सड़क दुर्घटना नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही और संवेदनहीनता का जीता-जागता उदाहरण है। अगर समय रहते रेलिंग लगाई गई होती, तो शायद आज एक परिवार का चिराग बुझने से बच जाता।

अब सवाल यह नहीं कि हादसा कैसे हुआ—
सवाल यह है कि क्या अब भी कोई सुनेगा?
या फिर अगली मौत के बाद वही फाइलें, वही सर्वे और वही आश्वासन दोहराए जाएंगे?

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