मध्य प्रदेश

नर्मदा जयंती पर वर्दी की दबंगई! चीचली मेले में पुलिस का आतंक—नाश्ते के पैसे मांगने पर दुकानदार को घसीटकर पीटा

नर्मदा जयंती पर वर्दी की मर्यादा तार-तार! चीचली मेले में दुकानदार से नाश्ते के पैसे न देने पर पुलिसकर्मियों पर गाली-गलौच और मारपीट के गंभीर आरोप

चीचली–गाडरवारा। 29 जनवरी 2026 को नर्मदा जयंती जैसे पावन और आस्था से जुड़े अवसर पर सीतारेवा नदी तट पर लगे मेले में जो हुआ, उसने वर्दी की साख, पुलिस की जवाबदेही और जनविश्वास—तीनों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों पर एक गरीब दुकानदार से नाश्ते के पैसे न देने, गाली-गलौच, धक्का-मुक्की और थाने ले जाकर मारपीट के गंभीर आरोप लगे हैं।

नाश्ता किया, पैसे मांगे तो भड़क गए पुलिसकर्मी

पीड़ित दुकानदार अनिल कहार (29 वर्ष) पिता मुन्नालाल कहार के अनुसार, शाम करीब 6 बजे थाना चीचली में पदस्थ तीन पुलिसकर्मी उसकी नाश्ते की दुकान पर पहुंचे।
करीब 15–20 मिनट तक कुर्सी पर बैठकर नाश्ता करने के बाद वे बिना भुगतान किए जाने लगे। जब दुकानदार ने विनम्रता से पैसे मांगे, तो पुलिसकर्मियों ने यह कहकर इंकार कर दिया कि “नाश्ता अच्छा नहीं था” और इसी बात को लेकर विवाद शुरू हो गया।

गाली-गलौच, भीड़ जमा होने पर आनलाइन पेमेंट

दुकानदार का आरोप है कि पैसे मांगने पर गाली-गलौच शुरू कर दी गई। मेले में भीड़ जमा होने के बाद लगभग 10 मिनट बाद मजबूरी में ऑनलाइन पेमेंट किया गया, लेकिन मामला यहीं नहीं रुका।

फिर पहुंचे अन्य पुलिसकर्मी, थाने चलने की धमकी

कुछ देर बाद अन्य पुलिसकर्मी, जिनमें एक एएसआई और सिपाही शामिल बताए जा रहे हैं, दोबारा दुकान पर पहुंचे और फिर से गाली-गलौच शुरू कर दी। दुकानदार को बाहर बुलाकर थाने चलने की धमकी दी गई।

बहन से धक्का-मुक्की, दुकानदार को मेले से घसीटा

पीड़ित का आरोप है कि इस दौरान उसकी बहन के साथ धक्का-मुक्की की गई और पुलिसकर्मी जबरन दुकान के अंदर घुस आए। विरोध करने पर अनिल कहार को मेले से घसीटते हुए पुलिस वाहन तक ले जाया गया। बीच-बचाव करने आए उसके भाई सुनील को भी वाहन में बैठाकर थाना चीचली ले जाया गया।

थाने में मारपीट का आरोप, भीड़ जुटने पर छोड़ा

पीड़ितों का आरोप है कि थाने में दोनों भाइयों के साथ मारपीट की गई। थाने के बाहर लोगों की भीड़ जमा होने और माहौल बिगड़ने पर पुलिस ने दोनों को छोड़ दिया।

माफी काफी है या कानून भी लागू होगा?

बताया जा रहा है कि बाद में थाना प्रभारी के सामने संबंधित पुलिसकर्मियों ने गलती स्वीकार की, लेकिन पीड़ित दुकानदार का कहना है कि

“सिर्फ माफी से न मेरी बेइज्जती मिट सकती है, न मानसिक आघात।”

CCTV फुटेज से खुलेगा सच?

पीड़ित ने मांग की है कि थाने के बाहर और मेले के आसपास लगे CCTV कैमरों की निष्पक्ष जांच कराई जाए, ताकि पूरे घटनाक्रम की सच्चाई सामने आ सके और दोषी पुलिसकर्मियों पर कड़ी विभागीय व कानूनी कार्रवाई हो।

पावन अवसर पर कलंक

नर्मदा जयंती जैसे धार्मिक और सांस्कृतिक अवसर पर हुई यह घटना क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है। आम लोगों का कहना है कि

“अगर वर्दी पहनकर आम दुकानदार के साथ ऐसा व्यवहार होगा, तो आम आदमी किससे न्याय की उम्मीद करे?”

अब सवाल यह नहीं है कि आरोप सही हैं या गलत,
सवाल यह है कि—

  • क्या निष्पक्ष जांच होगी?
  • क्या CCTV फुटेज सामने लाए जाएंगे?
  • या मामला ‘माफी’ में ही दबा दिया जाएगा?

सच्चाई क्या है—यह जांच में साफ होगा, लेकिन घटना ने प्रशासन और पुलिस की कार्यप्रणाली पर गहरा सवाल जरूर खड़ा कर दिया है।

 

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