गणतंत्र दिवस पर पर्यावरण संरक्षण का संदेश, पीएम श्री विद्यालय के पूर्व छात्रों की झांकी बनी आकर्षण का केंद्र
गणतंत्र दिवस पर सालीचौका में पीएम श्री विद्यालय के पूर्व छात्रों की पर्यावरण संरक्षण पर आधारित झांकी बनी आकर्षण का केंद्र, हरियाली और पौधारोपण से दिया पृथ्वी बचाने का संदेश।

संवाददाता अवधेश चौकसे
सालीचौका, नरसिंहपुर।
गणतंत्र दिवस के पावन अवसर पर आयोजित परेड में पीएम श्री विद्यालय के पूर्व छात्रों द्वारा तैयार की गई पर्यावरण संरक्षण पर आधारित झांकी ने लोगों का दिल जीत लिया। हरियाली, पौधारोपण और पृथ्वी संरक्षण के सशक्त संदेश के साथ यह झांकी कार्यक्रम की सबसे आकर्षक प्रस्तुति बनकर उभरी।
झांकी में तिरंगे रंगों से सजी हरित थीम, गमलों में लगे पौधे और एक छोटे बच्चे द्वारा पौधा लगाकर पृथ्वी को बचाने का प्रतीकात्मक दृश्य दर्शाया गया। यह प्रस्तुति पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता, भावी पीढ़ी की जिम्मेदारी और देशभक्ति की भावना को प्रभावी ढंग से दर्शाती नजर आई। झांकी ने यह संदेश दिया कि सच्ची राष्ट्रसेवा प्रकृति संरक्षण से भी जुड़ी है।
पूर्व छात्रों की मेहनत और टीमवर्क की मिसाल
इस प्रेरणादायी झांकी के निर्माण में शशिकांत गुर्जर, हरिओम गुर्जर, दुर्गेश वर्मा, तुलसीराम गुर्जर, फरहान, दिलशाद, सूर्यकांत गुर्जर, सूरज पटेल, नीलेश पटेल, रामनारायण पटेल, जगदीश पटेल, कृष्णकांत रजक, मनोज गुर्जर, साथ ही नितिन यादव एवं भूपेंद्र यादव का विशेष योगदान रहा।
परेड के दौरान अजय वंशकार, रोहित वंशकार एवं अजय बाथरे का सहयोग भी उल्लेखनीय रहा।
वृक्ष मित्र संस्था से जुड़ाव बना पहचान
उल्लेखनीय है कि विद्यालय के अधिकांश पूर्व छात्र वृक्ष मित्र संस्था, सालीचौका से सक्रिय रूप से जुड़े हुए हैं। संस्था के माध्यम से वे लगातार पौधारोपण, पौधों की देखरेख और पर्यावरण जागरूकता के कार्यों में भागीदारी निभा रहे हैं। यही कारण है कि उनकी सोच और कार्यशैली में पर्यावरण के प्रति गहरी संवेदनशीलता साफ दिखाई देती है।
समाज के लिए प्रेरणा बनी झांकी
परेड में उपस्थित नागरिकों, अतिथियों और दर्शकों ने झांकी की जमकर सराहना करते हुए इसे पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक प्रेरणादायी पहल बताया। यह झांकी इस बात का प्रमाण है कि पीएम श्री विद्यालय के छात्र आज भी अपने विद्यालय से मिले संस्कारों को समाजहित में आगे बढ़ा रहे हैं।
पूर्व छात्रों का यह प्रयास न केवल विद्यालय के लिए गर्व का विषय है, बल्कि पर्यावरण बचाने के संदेश को जन-जन तक पहुँचाने की एक सशक्त मिसाल भी है।







