धर्ममध्य प्रदेश

करणपुर में गूंजेगा शंखनाद, इतिहास रचने को तैयार छोटा सा गांव, झोतेश्वर से मिला दिव्य आशीर्वाद, शंकराचार्य जी की कृपा से मंदिर उद्घाटन का शुभ संयोग

नर्मदापुरम के करणपुर गांव में भव्य मंदिर उद्घाटन से रचेगा इतिहास, झोतेश्वर में शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती जी से प्राप्त आशीर्वाद से गांव बनेगा आस्था का केंद्र।

संवाददाता राकेश पटेल इक्का

नर्मदापुरम/सोहागपुर।
आस्था, श्रद्धा और सनातन परंपरा का अद्भुत संगम जल्द ही नर्मदापुरम जिले की सोहागपुर विधानसभा के छोटे से गांव करणपुर में देखने को मिलेगा। शांत और साधारण जीवन के लिए पहचाना जाने वाला यह गांव अब भव्य मंदिर उद्घाटन के साथ इतिहास रचने की दहलीज पर खड़ा है।

हाल ही में परमहंसी गंगा आश्रम, झोतेश्वर पहुंचकर मां भगवती के दर्शन का सौभाग्य प्राप्त हुआ। वहीं द्वारका शारदा पीठाधीश्वर जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती जी महाराज के चरणों में शीश नवाकर जो पुण्य आशीर्वाद मिला, उसने पूरे आयोजन को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया।
इस अवसर पर शंकराचार्य जी के निज सचिव ब्रह्मचारी सुबुद्धानंद जी महाराज का स्नेह और आशीर्वाद भी प्राप्त हुआ, जिससे मन श्रद्धा और उत्साह से ओत-प्रोत हो उठा।

छोटा गांव, बड़ा संकल्प

शंकराचार्य जी के इसी दिव्य आशीर्वाद से अब करणपुर गांव एक ऐतिहासिक क्षण का साक्षी बनने जा रहा है। गांव में होने वाला मंदिर उद्घाटन केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि पूरे गांव की अस्मिता, आस्था और सांस्कृतिक चेतना का उत्सव बन चुका है।

इस ऐतिहासिक आयोजन के पीछे हरगोविंद पुरबिया के अथक प्रयास, समर्पण और गहरी आस्था की अहम भूमिका रही है। उनके संकल्प ने गांव को नई पहचान देने का मार्ग प्रशस्त किया है।

गांव-गांव में गूंज रही चर्चा

देहात की गलियों से लेकर चौपालों तक आज एक ही चर्चा है—
“करणपुर अब साधारण गांव नहीं रहा।”
मां नर्मदा की पावन धरती पर साधु-संतों के आशीर्वाद से गांव का हर घर गर्व से कह रहा है कि उनके गांव में इतिहास लिखा जा रहा है।

आस्था का नया केंद्र बनेगा करणपुर

मंदिर उद्घाटन का यह शुभ अवसर न केवल वर्तमान पीढ़ी, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी प्रेरणा बनेगा। करणपुर अब धीरे-धीरे आस्था, संस्कृति और सनातन परंपरा के केंद्र के रूप में अपनी पहचान बना रहा है।

सच मायनों में देखा जाए तो आज करणपुर सिर्फ एक गांव नहीं, बल्कि श्रद्धा का तीर्थ बनने की ओर अग्रसर है।
शंकराचार्य जी के आशीर्वाद से शुरू हुआ यह संकल्प गांव की मिट्टी में ऐसा रंग घोल रहा है, जो लंबे समय तक चमकता रहेगा

 

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