बीजादेही में बिजली विभाग का सिस्टम ध्वस्त, मीटर रीडर की खुली लूट
लाइनमैन गायब, एक कर्मचारी के भरोसे पूरी व्यवस्था ,किसानों से हजारों की अवैध वसूली का आरोप

संवाददाता शैलेंद्र गुप्ता
शाहपुर। ग्राम पंचायत बीजादेही अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पूरी तरह सवालों के घेरे में आ गई है। क्षेत्र में पदस्थ मीटर रीडर रामदास यादव पर किसानों से खुलेआम अवैध वसूली करने के गंभीर आरोप सामने आए हैं। हालात यह हैं कि बिजली विभाग की उदासीनता ने एक कर्मचारी को पूरे क्षेत्र का अघोषित मुखिया बना दिया है। ग्रामीणों का आरोप है कि ग्राम बीजादेही और रतनढाना सहित आसपास के गांवों में अस्थायी बिजली कनेक्शन के नाम पर प्रति किसान 8,000 से 8,500 रुपये तक वसूले जा रहे हैं, जबकि सरकारी दर इससे 1,000 से 2,000 रुपये कम है। तय शुल्क से अधिक राशि लेना अब क्षेत्र में आम बात बन चुकी है। सबसे गंभीर बात यह है कि किसानों के अनुसार क्षेत्र में लाइनमैन कभी दिखाई ही नहीं देते। बिजली विभाग का पूरा कामकाज मीटर रीडर के भरोसे छोड़ दिया गया है। इसी ढील का फायदा उठाकर मीटर रीडर ने कई किसानों को 2,000 से 3,000 रुपये लेकर अवैध कनेक्शन दे रखे हैं, जिससे न केवल नियमों की धज्जियां उड़ रही हैं बल्कि शासन को सीधी राजस्व हानि भी हो रही है।
ग्रामीणों ने यह भी बताया कि पैसे लेकर 3 हॉर्स पावर के कनेक्शन पर 5 हॉर्स पावर की मोटर चलवाई जा रही है। नियमों के खिलाफ यह खेल पूरी तरह से खुलेआम चल रहा है। आरोप है कि जो किसान अवैध वसूली का विरोध करता है या पैसे देने से मना करता है, उसके साथ सख्ती की जाती है।कभी बिजली का तार काट लिया जाता है, तो कभी केस बनाने की धमकी देकर डराया जाता है।
क्षेत्र के किसानों का कहना है कि बिजली विभाग की लापरवाही और निगरानी के अभाव में मीटर रीडर बेखौफ होकर अवैध वसूली कर रहा है। यह स्थिति दर्शाती है कि विभागीय अधिकारियों ने जमीनी हकीकत से आंखें मूंद रखी हैं। ग्रामीणों ने बिजली विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से कड़ी मांग की है कि इस पूरे मामले की तत्काल जांच कराई जाए, क्षेत्र में हो रही अवैध वसूली पर तुरंत रोक लगे और आरोपित मीटर रीडर को हटाकर निष्पक्ष कार्रवाई की जाए। किसानों का कहना है कि यदि अब भी कार्रवाई नहीं हुई, तो वे मजबूरन बड़े स्तर पर आंदोलन और शिकायत का रास्ता अपनाएंगे।
यह मामला सिर्फ एक कर्मचारी की मनमानी का नहीं, बल्कि बिजली विभाग की प्रशासनिक विफलता का आईना है, जिसमें किसान शोषण का शिकार बन रहे हैं और शासन को नुकसान पहुंचाया जा रहा है। अब देखना यह है कि विभाग के जिम्मेदार अधिकारी कब जागते हैं और कब इस लूट पर लगाम लगती है।







