नर्मदापुरम के एसडीओपी जितेन्द्र पाठक: अनुभव, अनुशासन और जनविश्वास से बनी सशक्त पुलिसिंग की मिसाल
कुर्सी नहीं, कर्म से बनी पहचान; फील्ड से लेकर अंतरराष्ट्रीय मंच तक अनुकरणीय सेवाओं का सफर

संवाददाता राकेश पटेल इक्का
SDOP Jitendra Pathak
नर्मदापुरम। पुलिस सेवा में कुछ अधिकारी ऐसे होते हैं जिनकी पहचान पद से नहीं, बल्कि उनके कर्म, आचरण और निरंतर प्रतिबद्धता से बनती है। नर्मदापुरम के एसडीओपी श्री जितेन्द्र पाठक ऐसे ही अनुकरणीय अधिकारियों में शामिल हैं, जिनकी कार्यशैली अनुशासन, संवेदनशीलता और जनसेवा के संतुलन का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करती है।
26 वर्षों की फील्ड आधारित सेवा का अनुभव
वर्ष 1998 बैच के इस वरिष्ठ अधिकारी ने लगभग 26 वर्षों की सेवा में सब-इंस्पेक्टर से लेकर इंस्पेक्टर, थाना प्रभारी, सीआईडी एवं वर्तमान में एसडीओपी जैसे महत्वपूर्ण दायित्वों का निर्वहन किया है। उनकी पूरी सेवा मैदानी अनुभव पर आधारित रही है, जिसने उन्हें जमीनी हकीकत से जोड़ते हुए एक प्रभावी नेतृत्वकर्ता बनाया।

संयुक्त राष्ट्र मिशन में भारत का गौरव बढ़ाया
श्री जितेन्द्र पाठक ने दक्षिणी सूडान में संयुक्त राष्ट्र के शांति मिशन के दौरान गृहयुद्ध जैसे कठिन हालातों में अपनी सेवाएं दीं। बंकरों में रहकर और जान जोखिम में डालकर उन्होंने न केवल शांति स्थापना में योगदान दिया, बल्कि भारतीय पुलिस और तिरंगे की प्रतिष्ठा को अंतरराष्ट्रीय मंच पर मजबूती प्रदान की।
अपराधों पर सख्त प्रहार, संगठित गिरोहों पर कार्रवाई
मंदसौर, व्हायडी नगर एवं आसपास के क्षेत्रों में पदस्थापना के दौरान उनके नेतृत्व में
- अफीम तस्करी
- डोडाचूरा
- चंदन तस्करी
- अवैध शराब
- सट्टा जैसे संगठित अपराधों
पर निर्णायक कार्रवाई की गई। भारी मात्रा में अवैध मादक पदार्थों की बरामदगी, लाखों रुपये की जब्ती, ईनामी बदमाशों की गिरफ्तारी और डकैती की योजनाओं को विफल करना उनकी प्रमुख उपलब्धियों में शामिल है। व्हायडी नगर थाना उनके नेतृत्व में अनुकरणीय पुलिसिंग का प्रतीक बनकर उभरा।
“फिट कॉप” के रूप में युवाओं के प्रेरणास्रोत

श्री पाठक पुलिसिंग को केवल कानून व्यवस्था तक सीमित नहीं मानते, बल्कि शारीरिक और मानसिक फिटनेस को भी उतना ही आवश्यक मानते हैं। नियमित दौड़, एथलेटिक्स, 800 मीटर रेस, लंबी कूद और गोला फेंक जैसे अभ्यास उनके दैनिक जीवन का हिस्सा हैं। इसी कारण वे युवाओं के बीच “फिट कॉप” के नाम से लोकप्रिय हैं।
पुलिस भर्ती की तैयारी कर रहे युवाओं के मार्गदर्शक
ग्रामीण और शहरी पृष्ठभूमि से आने वाले युवाओं के लिए वे प्रेरणा और मार्गदर्शन का स्रोत हैं। सोशल मीडिया और प्रत्यक्ष प्रशिक्षण के माध्यम से वे
- सही तकनीक
- अनुशासित अभ्यास
- मानसिक मजबूती
पर जोर देते हैं। कई चयनित अभ्यर्थी उनके मार्गदर्शन को अपनी सफलता का आधार मानते हैं।
भय नहीं, विश्वास पर आधारित पुलिसिंग
एसडीओपी जितेन्द्र पाठक की कार्यशैली का सबसे मजबूत पक्ष है जनविश्वास। फरियादी की बात को गंभीरता से सुनना, पीड़ित को न्याय का भरोसा देना और अपराधियों के प्रति सख्त रवैया अपनाना—यही संतुलन उनकी पुलिसिंग को प्रभावी बनाता है। इसी कारण पुलिस के प्रति जनता का भरोसा और सम्मान लगातार मजबूत हुआ है।
आधुनिक, संवेदनशील और प्रभावी पुलिसिंग की पहचान
कुल मिलाकर, श्री जितेन्द्र पाठक उन अधिकारियों में हैं जो वर्दी को केवल पहनते नहीं, बल्कि उसके मूल्यों को पूरी निष्ठा से जीते हैं। उनके जैसे अधिकारियों की मौजूदगी से न केवल कानून-व्यवस्था सुदृढ़ होती है, बल्कि समाज में पुलिस के प्रति विश्वास भी स्वतः स्थापित होता है।







