थाना स्टाफ और 112 टीम को मिला CPR प्रशिक्षण: आपात स्थिति में जीवन बचाने की तकनीक सीखी
सोहागपुर थाना में डॉक्टरों की टीम ने पुलिस स्टाफ और 112 वाहन कर्मियों को CPR प्रशिक्षण दिया। कार्यक्रम में कार्डियक अरेस्ट की स्थिति में जीवन बचाने की तकनीक समझाई गई।

संवाददाता राकेश पटेल इक्का
सोहागपुर (नरसिंहपुर)। पुलिस मुख्यालय एवं वरिष्ठ अधिकारियों के दिशा-निर्देशानुसार थाना परिसर में CPR (Cardiopulmonary Resuscitation) प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह प्रशिक्षण पुलिस सहायता वाहन 112 के स्टाफ, पायलटों एवं थाना के अधिकारी-कर्मचारियों को दिया गया।
कार्यक्रम में प्रशिक्षण देने के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सोहागपुर से आए डॉक्टर अरुण यादव एवं डॉ. प्रसनजीत सिंह ने CPR की बारीकियों को विस्तार से बताया और मौके पर डेमो (प्रदर्शन) भी किया।
डॉक्टरों ने समझाया — क्या है CPR और क्यों है यह जीवन रक्षक तकनीक
प्रशिक्षण के दौरान डॉक्टरों ने बताया कि CPR का अर्थ Cardiopulmonary Resuscitation (कार्डियो पल्मोनरी रिससिटेशन) है। यह एक आपातकालीन जीवन रक्षक तकनीक (Emergency Life-Saving Technique) है, जिसका प्रयोग तब किया जाता है जब किसी व्यक्ति का दिल धड़कना बंद हो जाए या साँस रुक जाए — यानी कार्डियक अरेस्ट की स्थिति में।
डॉ. अरुण यादव ने बताया कि CPR के दौरान छाती को दबाना (Chest Compression) और मुँह से साँस देना (Rescue Breathing) शामिल होता है। इससे मस्तिष्क और अन्य महत्वपूर्ण अंगों तक रक्त और ऑक्सीजन का प्रवाह बना रहता है, जिससे व्यक्ति की जान बचाई जा सकती है।
112 वाहन टीम को मिली विशेष जानकारी
डॉक्टरों ने बताया कि 112 वाहन अक्सर किसी भी दुर्घटना या आपात स्थिति में सबसे पहले मौके पर पहुँचने वाली टीम होती है, इसलिए उन्हें प्राथमिक चिकित्सा और CPR की जानकारी होना अत्यंत आवश्यक है।
प्रशिक्षण के दौरान डॉक्टरों की टीम ने थाना परिसर में CPR का डेमो भी दिया और यह बताया कि जब तक घायल व्यक्ति को नजदीकी अस्पताल नहीं पहुँचाया जा सके, तब तक यह तकनीक जीवन बचाने में मददगार हो सकती है।
थाना स्टाफ एवं 112 वाहन के पायलटों ने प्रशिक्षण के दौरान कई व्यावहारिक प्रश्न पूछे, जिनका समाधान डॉक्टरों की टीम द्वारा विस्तार से किया गया।
पुलिस मुख्यालय का उद्देश्य — हर जवान बने ‘लाइफ सेवर’
वरिष्ठ अधिकारियों के दिशा-निर्देश पर आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पुलिस स्टाफ और 112 टीम न केवल सुरक्षा, बल्कि आपात स्वास्थ्य सहायता में भी सक्षम हो। इससे दुर्घटना या दिल का दौरा जैसी स्थितियों में प्रारंभिक चिकित्सा (First Response) समय पर मिल सके।







