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जनसुनवाई में छलावा! नर्मदापुरम जिला पंचायत में जनता की फरियादें फिर फाइलों में कैद

77 फरियादी पहुंचे, लेकिन सुनवाई में हवा हो गई शिकायतें — ग्रामीण बोले “जनसुनवाई नहीं, दिखावे की रस्म है!”

संवाददाता राकेश पटेल इक्का

नर्मदापुरम। मंगलवार को जिला पंचायत में जनसुनवाई का डंका तो बजा, लेकिन जनता को मिला सिर्फ़ आश्वासन का झुनझुना।
कुल 77 फरियादी अपनी समस्याएं लेकर पहुंचे, पर ज़्यादातर की बातों पर कार्रवाई के बजाय औपचारिकता निभाई गई।

ग्रामीण बोले – “सुनने वाला कोई नहीं”

ग्राम धनासिरी के हल्के वीर राजस्व रिकॉर्ड में नाम सुधार की फरियाद लेकर पहुंचे। सीईओ का जवाब फिर वही –

“देखते हैं, अधिकारी को भेज देंगे।”
हल्के बोले – “तीन महीने से यही जवाब सुन रहे हैं, अब भरोसा उठ गया।”

मौके पर दिखावा, सिस्टम की वही खामियां

संजय कुमार गुप्ता की डी-लिंकिंग समस्या का “मौके पर समाधान” दिखाया गया, पर कंप्यूटर स्क्रीन ने सच्चाई खोल दी –
सिस्टम में वही पुरानी गड़बड़ी जस की तस रही।

तुलसा बाई (नर्मदापुरम) ने बारिश में ढहे घर के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना से मदद मांगी,
सीईओ ने कहा – “पात्रता देखी जाएगी।”

वहीं आशुतोष बाजपेयी (दांडीवाड़ा, केसला) ने पिता की मौत के बाद अनुकंपा नियुक्ति की गुहार लगाई,
जवाब मिला – “प्रक्रिया में है।”

जनता का दर्द – “फाइलों में ही दफन होती हैं हमारी फरियादें”

गाँव-गाँव से आए लोगों ने कहा,

“हम हर बार आते हैं, लेकिन हमारी समस्याएँ सिर्फ़ कागज़ों तक सीमित रह जाती हैं।
जनसुनवाई में सुनते सब हैं, पर करते कोई नहीं।”

अधिकारी मौजूद, पर जनता को नहीं मिला भरोसा

सीईओ हिमांशु जैन, संयुक्त कलेक्टर सुनील जैन, डिप्टी कलेक्टर डॉ. बबीता राठौर और एसडीएम नीता कोरी मौजूद रहे।
लेकिन लोगों का कहना था –

“हमारे लिए ये सिर्फ़ औपचारिकता है, नतीजा पहले से तय होता है।”

जनता का तंज – “जनसुनवाई? नाम ही सही, काम कुछ नहीं!”

अंत में निराश जनता ने कहा –

“जनसुनवाई का नाम सुनकर आते हैं, लेकिन यहां सिर्फ़ दिखावा होता है।
फरियादें फाइलों में दफन हो जाती हैं और अधिकारी अगले हफ्ते की तैयारी में लग जाते हैं।”

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