बागरा तवा रेलवे स्टेशन पर विंध्याचल एक्सप्रेस का स्टॉपेज नही

संवाददाता राकेश पटेल एक्का
बागरा तवा। रेलवे स्टेशन पर विंध्याचल एक्सप्रेस का स्टॉपेज नहीं होने से इलाके के हजारों लोगों को हो रही भारी परेशानी पर अब सबकी नज़रें सांसद चौधरी दर्शन सिंह पर हैं। हालांकि यह कोई नई समस्या नहीं है, लेकिन हालिया घटनाओं ने इसे और अधिक गंभीर बना दिया है। भाई दूज के मौके पर, जब सैकड़ों लोग अपने परिवारों से मिलने के लिए यात्रा करने की योजना बना रहे थे, तब वही पुरानी समस्या फिर से सामने आई— विंध्याचल एक्सप्रेस का न रुकना।
बागरा तवा रेलवे स्टेशन, जो 61 पंचायतों और 132 गांवों के करीब 50,000 लोगों के लिए एक अहम परिवहन केंद्र है, वर्षों से इस ट्रेन के स्टॉपेज की मांग कर रहा है। पिछले कुछ समय से यह मांग और भी जोर पकड़ चुकी है, क्योंकि अब लोग इटारसी और भोपाल जाने के लिए अधिक दूरी तय करने को मजबूर हो रहे हैं।
स्थिति की गंभीरता को लेकर स्थानीय निवासी अब सीधे सांसद चौधरी दर्शन सिंह से उम्मीद लगाए हुए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि पिपरिया में खेल मैदान बनाने के लिए मंत्री जी को बुलाया जा सकता है, तो क्या यह इतना मुश्किल है कि बागरा तवा में ट्रेन का स्टॉपेज सुनिश्चित किया जाए?
एक स्थानीय निवासी, रामलाल यादव (65), बताते हैं, “पहले जब ट्रेन रुकती थी, तो सफर बहुत आरामदायक था। अब या तो इटारसी या फिर भोपाल जाना पड़ता है, और दोनों जगहों तक पहुँचने में आधे दिन से भी ज्यादा समय लग जाता है।”
भाई दूज पर जब लाखों लोग अपने घरों के लिए रवाना होते हैं, तो बागड़ा ताबा स्टेशन पर ट्रेन का न रुकना एक असहनीय स्थिति उत्पन्न कर देता है। यह केवल एक ट्रेनों के स्टॉपेज का मुद्दा नहीं, बल्कि ग्रामीण जीवन की एक बुनियादी ज़रूरत बन चुकी है। लोग अब यह सवाल उठाने लगे हैं कि क्या प्रशासन और सांसद साहब हमारे इस दर्द को महसूस नहीं कर रहे हैं?

सांसद चौधरी दर्शन सिंह से उम्मीदें:
स्थानीय लोग सांसद चौधरी दर्शन सिंह से एक बार फिर इस मुद्दे का समाधान करने की अपील कर रहे हैं। उनका मानना है कि यदि सांसद जी ने पिपरिया में खेल ग्राउंड के लिए कदम उठाए हैं, तो बागरा तवा रेलवे स्टेशन पर विंध्याचल एक्सप्रेस का स्टॉपेज भी संभव है।
राजनीतिक दृष्टिकोण से देखें तो यह मुद्दा केवल क्षेत्रीय यातायात का नहीं, बल्कि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच की असमानताओं का भी प्रतीक बन चुका है। सरकार के प्रयासों में अब तक कोई ठोस परिणाम नहीं आ सका है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों के नागरिकों में निराशा की भावना पनप रही है।
मौजूदा स्थिति में, बागरा तवा के लोग केवल एक छोटी सी मांग कर रहे हैं—वह है विंध्याचल एक्सप्रेस का स्टेशन पर रुकना। यह उनके जीवन की रोजमर्रा की समस्याओं का समाधान करेगा और उन्हें बड़ी यात्रा न करने की सुविधा देगा।
वहीं, रेल मंत्रालय और राज्य सरकार की तरफ से अब तक इस पर कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं, जिससे यह सवाल उठता है कि आखिरकार ग्रामीण भारत की आवाज़ कब सुनी जाएगी।
अब यह सांसद चौधरी दर्शन सिंह पर निर्भर है कि वह इस मुद्दे को कितनी गंभीरता से लेते हैं और क्या वे अपने चुनावी क्षेत्र के लोगों की उम्मीदों को पूरा करने में सफल होंगे। यह सिर्फ़ एक रेलवे स्टेशन के स्टॉपेज का मुद्दा नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया में ग्रामीण इलाकों की आवाज़ के दबाव का भी प्रतीक बन चुका है।







