मध्य प्रदेशस्वास्थ्य

गरीबों की मुस्कान बनी सबसे बड़ी दुआ — हरि गोविंद पुरविया की ‘शुगर एक्सप्रेस’ से 500 जीवनों में लौटी मिठास

शुगर एक्सप्रेस हरि गोविंद पुरविया और डॉ. सचिन चित्तावार ने करनपुर में लिखा सेवा का नया अध्याय

संवाददाता राकेश पटेल इक्का

नर्मदापुरम। 5 अक्टूबर 2025 को नर्मदापुरम जिले के ग्राम करनपुर में आयोजित “निःशुल्क मधुमेह एवं हार्मोन उपचार शिविर – शुगर एक्सप्रेस ने समाजसेवा की एक नई मिसाल पेश की। वरिष्ठ समाजसेवी हरि गोविंद पुरविया की प्रेरणा और प्रसिद्ध एंडोक्रिनोलॉजिस्ट डॉ. सचिन चित्तावार के मार्गदर्शन में हुए इस आयोजन ने सैकड़ों ग्रामीणों को स्वास्थ्य का वरदान दिया।

डॉ. सचिन चित्तावार ने स्वयं की मरीजों की जांच

 

गरीबों की मुस्कान बनी सबसे बड़ी दुआ — हरि गोविंद पुरविया की ‘शुगर एक्सप्रेस’ से 500 जीवनों में लौटी मिठास

सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक चले इस शिविर में डॉ. चित्तावार ने स्वयं सैकड़ों मरीजों की जांच की, मधुमेह और हार्मोन संबंधी बीमारियों का उपचार किया तथा लोगों को स्वस्थ जीवनशैली के प्रति जागरूक किया। उनकी सादगी और सेवा भाव देखकर मरीजों की आंखों में विश्वास और कृतज्ञता झलक उठी।

हरि गोविंद पुरविया बने ग्रामीणों की उम्मीद

समाजसेवा को जीवन का लक्ष्य मानने वाले हरि गोविंद पुरविया ने कहा कि “सेवा का अर्थ केवल सहायता नहीं, बल्कि संवेदना से जीवन को बदलना है।”
उनके नेतृत्व में यह निःशुल्क शिविर 500 से अधिक ग्रामीणों के लिए वरदान साबित हुआ। किसी से एक पैसा तक नहीं लिया गया। जिन्होंने वर्षों से इलाज के लिए शहरों में भटकना छोड़ दिया, उन्हें अब अपने गांव में ही राहत मिली।

स्वास्थ्य और संवेदना का संगम

इस आयोजन का उद्देश्य ग्रामीण अंचलों में मधुमेह और हार्मोन संबंधी बीमारियों के प्रति जागरूकता बढ़ाना था। कार्यक्रम में लोगों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के उपाय बताए गए। शिविर के दौरान सहयोगी टीम ने मरीजों को मुफ्त दवाएं और परामर्श भी दिया।

गांव के लोगों की प्रतिक्रिया

गांव के बुजुर्गों ने कहा,

“अगर हर जिले में हरि गोविंद पुरविया जैसे समाजसेवी हों, तो कोई भी गरीब बिना इलाज के न मरे।”

गरीबों की मुस्कान बनी सबसे बड़ी दुआ — हरि गोविंद पुरविया की ‘शुगर एक्सप्रेस’ से 500 जीवनों में लौटी मिठास

मानवता का उत्सव

यह आयोजन सिर्फ एक स्वास्थ्य शिविर नहीं, बल्कि मानवता का उत्सव था।
नर्मदापुरम में यह दिन इतिहास बन गया — जब सेवा, संवेदना और समर्पण का संगम करनपुर की धरती पर चमका।

 

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